संग्राम सिंह रेवई की रिपोर्ट
Bokaro: धनबाद सांसद ढुल्लू महतो ने शुक्रवार को धनबाद में एयरपोर्ट निर्माण को विशाल धरना प्रदर्शन किया. जमकर भीड़ लगी, जमकर नारेबाजी हुई. जिंदाबाद में किसी प्रकार की कमी ना हो इसलिए पूर्व सांसद पशुपतिनाथ सिंह को भी आमंत्रित किया गया. लेकिन, सांसद महोदय संभवत यह भूल गए कि बोकारो भी धनबाद लोकसभा क्षेत्र में ही आता है, जहां वर्षों से एयरपोर्ट तैयार होकर उड़ान का इंतजार कर रहा है. थोड़ा सा एफर्ट लगा दिया जाए तो उड़ान फौरन शुरू हो जाए. सांसद द्वारा धनबाद में एयरपोर्ट निर्माण संबंधित किए गए धरना प्रदर्शन का बोकारो पर बड़ा असर दिख रहा है. लोग तरह-तरह की बात कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि यातायात की नजरिया से बोकारो पहले ही पिछड़ा हुआ है, अब अगर एयरपोर्ट पर रामभक्त सांसद की नजर लग गई तो ये अच्छी खबर नहीं होगी.
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बोकारो में ट्रेन की भी उचित व्यवस्था नहीं
यहां बताना जरूरी है की धनबाद ईस्टर्न सेंट्रल रेलवे की ग्रैंड कार्ड रेलवे लाइन से सीधे जुड़ा हुआ है. कोलकाता दिल्ली मुंबई समेत देश के कोने-कोने के लिए धनबाद से सीधी ट्रेन व्यवस्था है. लेकिन, बोकारो में सीधी ट्रेन व्यवस्था तो छोड़ दीजिए कई राज्यों से ट्रेन का कनेक्शन भी नहीं है, जबकि बोकारो में कोल इंडिया, सेल, ओएनजीसी, डीवीसी समेत कई पीएसयू इकाई हैं. इसके अलावा डालमिया सीमेंट और वेदांता की बड़ी इकाई भी है, जो कि बोकारो को यातायात की मांग को लेकर धनबाद से कहीं आगे खड़ा करता है.
बोकारो के साथ पहले भी हुई है हकमारी
देश का पहला स्वदेशी इस्पात संयंत्र का तमगा बोकारो इस्पात संयंत्र को मिला है. लेकिन आजतक संयंत्र पूर्ण रूप से तैयार नहीं हो सका है. 10 मिलियन टन क्षमता का सपना आजतक सपना ही रह गया. इसी तरह बोकारो जेनरल अस्पताल को उतर भारत के सबसे बड़ा अस्पताल का दर्जा प्राप्त है. बोकारो जेनरल अस्पताल को मेडिकल कॉलेज बनाने का ख्वाब तो बहुत देखा और दिखाया गया, लेकिन आजतक सपना ही रह गया.
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बोकारो इस्पात संयंत्र का विस्तारीकरण भी नहीं हो सका
बोकारो इस्पात संयंत्र के अधिकार का हिस्सा चाहे विस्तारीकरण का हो या अस्पताल मामले में सुधार की, हर बार राउरकेला लेकर गया है. शुरुआत 1977 से हुई है. जब तत्कालीन इस्पात मंत्री बीजू पटनायक बीएसएल के दौरा पर आये थे. विस्तारीकरण की योजना के तहत आये बीजू पटनायक के साथ बोकारो के स्थानीय नेता के गलत व्यवहार के कारण योजना को विशाखापट्टनम व राउरकेला स्थानांतरित कर दिया गया. इसके बाद विस्तारीकरण का सपना बस सपना ही रह गया.
बोकारो जनरल अस्पताल नहीं बन सका मेडिकल कॉलेज
इसी तरह बोकारो जनरल अस्पताल को मेडिकल कॉलेज बनाने की मांग 1990 से हो रही है. हालिया प्रकरण 3 अगस्त 2018 का है. सेल की ओर से बोकारो में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए राज्य सरकार को 25 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने की बात कही गयी. नई दिल्ली में इस संबंध में आयोजित बैठक में तत्कालीन इस्पात संयंत्र मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने इस पर सहमति जतायी. केंद्रीय इस्पात मंत्रालय की सचिव अरुणा शर्मा व सेल के पदाधिकारी समेत राज्य से स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव निधि खरे बैठक में शामिल हुई थी. मेडिकल कॉलेज का निर्माण पूरी तरह राज्य बजट से करने व इस मेडिकल कॉलेज को बोकारो जनरल अस्पताल से टैग करने पर सहमति बनी थी. लेकिन, योजना धरी की धरी रह गयी. दूसरी ओर इस्पात जनरल अस्पताल (राउरकेला) में साल 2021 में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का उद्घाटन किया गया. 250 करोड़ से अधिक का बजट अस्पताल को दिया गया. कार्यक्रम में केंद्रीय इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी शामिल हुए. इसके बाद ओड़िशा के तत्कालीन मंत्री प्रफुल्ल मल्लिक ने पत्र लिख कर अस्पताल को मेडिकल कॉलेज से टैग करने की मांग की थी. श्री मल्लिक ने सजगता दिखाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वादा को याद दिलाया, जिसमें नरेन्द्र मोदी ने अस्पताल को कॉलेज का दर्जा देने की बात कही थी. दूसरी ओर बोकारो जेनरल अस्पताल के अपग्रेडेशन व मेडिकल कॉलेज से टैग करने के लिए कोई पहल नहीं हुई.
