जन्म–मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए चार माह से भटक रहे मुखिया, प्रखंड कार्यालय में हंगामा

Hazaribagh:हजारीबाग कटकमसांडी प्रखंड क्षेत्र में जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र निर्गत करने में हो रही देरी अब जनप्रतिनिधियों के लिए भी सिरदर्द बनती...

Hazaribagh:हजारीबाग कटकमसांडी प्रखंड क्षेत्र में जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र निर्गत करने में हो रही देरी अब जनप्रतिनिधियों के लिए भी सिरदर्द बनती जा रही है.आराभुसाई पंचायत के मुखिया आदित्य दांगी को अपने ही पंचायत के एक जन्म प्रमाणपत्र के लिए पिछले चार माह से प्रखंड मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. इसी मुद्दे को लेकर प्रखंड कार्यालय में मुखिया और ऑपरेटर के बीच जमकर तू-तू, मैं-मैं हो गई.जानकारी के अनुसार, मुखिया आदित्य दांगी ने करीब चार माह पूर्व सभी आवश्यक कागजातों के साथ जन्म प्रमाणपत्र के लिए आवेदन प्रखंड कार्यालय में जमा कराया था. बावजूद इसके अब तक प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया. आरोप है कि हर बार अलग-अलग बहाने बनाकर उन्हें टाल दिया जाता है.

मुखिया आदित्य दांगी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “बिना पैसा दिए यहां कोई काम नहीं होता. चार महीने से लगातार दौड़ लगा रहा हूं, लेकिन हर बार नई कमी बताकर फाइल रोक दी जाती है.” उन्होंने यह भी कहा कि जब एक जनप्रतिनिधि को इस तरह परेशान किया जा रहा है, तो आम जनता की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है.मंगलवार को जब मुखिया आदित्य दांगी पुनः कार्यालय पहुंचे और देरी का कारण पूछा, तो वहां मौजूद ऑपरेटर के साथ उनकी तीखी बहस हो गई. देखते ही देखते मामला बढ़ गया और कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. हालांकि बाद में पंचायत सचिव,अन्य कर्मियों और लोगों के हस्तक्षेप से मामला शांत कराया गया.

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रखंड कार्यालय में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए लोगों को महीनों इंतजार करना पड़ता है. कई बार आवश्यक कागजात जमा करने के बाद भी प्रक्रिया लंबित रखी जाती है, जिससे लोगों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं.ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी कर्मियों पर कार्रवाई की जाए. साथ ही प्रमाणपत्र निर्गत करने की प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए, ताकि आम लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े.

यह मामला न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि सरकारी योजनाओं और सेवाओं की जमीनी हकीकत को भी उजागर करता है. अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले पर क्या कदम उठाता है और लोगों को कब तक राहत मिलती है.

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