Ranchi: झारखंड सरकार ने राज्य कर्मियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ाते हुए राज्य कर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना को एक नए और बेहद शक्तिशाली स्वरूप में लांच किया है. इस क्रांतिकारी पहल के तहत अब राज्य के सरकारी कर्मचारियों और उनके आश्रितों को न केवल झारखंड, बल्कि देशभर के 600 से अधिक सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों (वेल्लोर, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद और बेंगलुरु) में कैशलेस और अनलिमिटेड इलाज की सुविधा मिलेगी.
हर कर्मचारी को स्वास्थ्य बीमा कार्ड
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि झारखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन रहा है, जहां हर कर्मचारी को स्वास्थ्य बीमा कार्ड दिया जा रहा है. सरकार ने इस योजना का विस्तार करते हुए इसमें अधिवक्ताओं, आईएएस-आईपीएस अधिकारियों, पूर्व विधायकों और पूर्व सांसदों को भी शामिल कर लिया है. स्वास्थ्य मंत्री ने भविष्य की योजनाओं का खाका खींचते हुए बताया कि राज्य में मेडिको सिटी, रिम्स-2 और मेडिकल कॉलेजों के विस्तार पर युद्ध स्तर पर काम चल रहा है.
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क्या है इस योजना की खासियत?
• अस्पतालों का विशाल नेटवर्क: राज्य के 200 और देश के 600 नामी अस्पतालों में अब कर्मचारी सीधे जाकर कैशलेस इलाज करा सकेंगे.
• आर्थिक बोझ से मुक्ति: इलाज सीजीएचएस दरों पर होगा. ओपीडी, दवाओं का खर्च, फॉलोअप और यात्रा भत्ता जैसी सुविधाएं भी इसमें शामिल हैं.
• 7 लाख लाभार्थियों को सुरक्षा: वर्तमान में 2 लाख कर्मचारियों सहित कुल 7 लाख से अधिक लोग इस कवच के दायरे में आ गए हैं.
• रिवॉल्विंग फंड: गंभीर स्थितियों के लिए मेडिकल एडवांस और रिवॉल्विंग फंड की पारदर्शी व्यवस्था की गई है.
• आम जनता को भी तोहफा: आम नागरिकों के लिए अबुआ कार्ड के तहत स्वास्थ्य बीमा की राशि 5 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दी गई है.
किन्हें मिलेगा लाभ?
• कटेगरी एक : विधानसभा के वर्तमान सदस्य और राज्य के सभी कार्यरत सरकारी कर्मी.
• कटेगरी बी : पूर्व विधायक, रिटायर्ड कर्मचारी, पारिवारिक पेंशनभोगी और विभिन्न बोर्ड-निगमों के कर्मी.
• कटेगरी सी : झारखण्ड अधिवक्ता कल्याण निधि न्यासी समिति के अंतर्गत निबंधित अधिवक्ता.
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प्रीमियम और वेतन से कटौती का गणित
• वेतन से कटौती: कार्यरत कर्मियों को वर्तमान में मिल रहे 1000 चिकित्सा भत्ते में से 500 की कटौती की जाएगी (सालाना 6000). शेष 500 का भुगतान उन्हें ओपीडी और दवाओं के लिए नकद मिलता रहेगा.
• रिटायर्ड कर्मियों के लिए: श्रेणी ‘बी ‘ के लाभार्थी 6000 रुपए का वार्षिक प्रीमियम सीधे ‘पेमेंट गेटवे’ के माध्यम से जमा कर सकेंगे.
• अधिवक्ताओं के लिए: निबंधित अधिवक्ताओं का 6000 रुपए का प्रीमियम ‘अधिवक्ता कल्याण निधि न्यासी समिति’ द्वारा एकमुश्त जमा किया जाएगा.
इलाज की सीमा और कॉरपस फंड
• झारखण्ड सरकार ने इस योजना को केंद्र की सीजीएचएस की तर्ज पर बनाया है:
• सामान्य इलाज: प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख.
• गंभीर बीमारीः कैंसर, किडनी/लिवर ट्रांसप्लांट और हृदय रोग जैसी 25 गंभीर बीमारियों के लिए 10 लाख तक की सुविधा.
• असीमित कवर: यदि इलाज का खर्च 10 लाख से ऊपर जाता है, तो ‘आरोग्य सोसाइटी’ अपने कॉरपस फण्ड से ट्रस्ट मोड में इसका भुगतान करेगी. यानी बीमित व्यक्ति को इलाज के लिए हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा.
आश्रितों की परिभाषा और अन्य लाभ
• परिवार का दायरा: पति/पत्नी, 25 वर्ष तक के बेरोजगार बेटे, अविवाहित/विधवा बेटियां और आश्रित माता-पिता इस योजना में शामिल होंगे.
• दिव्यांगों को तोहफा: दिव्यांग आश्रितों को आजीवन स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिलेगा.
• अस्पताल के पहले और बाद का खर्च: अस्पताल में भर्ती होने से 15 दिन पहले और डिस्चार्ज होने के 30 दिन बाद तक के दवा-जांच का खर्च बीमा कंपनी उठाएगी.
• स्मार्ट कार्ड: सभी लाभार्थियों को मुफ्त में पीवीसी हेल्थ कार्ड जारी किए जाएंगे.
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त्रुटियों को सुधारने के लिए री-रजिस्ट्रेशन
पुराने आवेदनों में पाई गई त्रुटियों को देखते हुए अब वेब पोर्टल पर पुनः रजिस्ट्रेशन शुरू किया जाएगा. इस बार पारदर्शिता के लिए कार्यरत कर्मियों के आवेदन का सत्यापन उनके संबंधित डीडीओ द्वारा ऑनलाइन किया जाएगा.
