Ranchi: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अंगदान को लेकर समाज में एक नई चेतना जगाने का आह्वान किया है. बरियातू रोड स्थित एक स्थानीय होटल में मोहन फाउंडेशन की ओर से आयोजित बेस्ट प्रैक्टिस इन ऑर्गन एंड टिशु डोनेशन कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, कि अंगदान सिर्फ एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व का सबसे बड़ा उदाहरण है. उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र के संस्थानों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से एकजुट होकर इस दिशा में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की अपील की.
काउंसिलिंग पर जोर: दुःख की घड़ी में संवेदनशीलता जरूरी
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में एक व्यावहारिक सुझाव साझा किया. उन्होंने कहा कि अक्सर अस्पतालों में किसी मरीज की मृत्यु के बाद परिवार गहरे सदमे में होता है. ऐसे समय में डॉक्टर्स और काउंसिलर्स को बेहद संवेदनशीलता के साथ परिजनों से बात करनी चाहिए. यदि सही समय पर और सही तरीके से परिवार को अंगदान के महत्व के बारे में समझाया जाए, तो वे आगे आ सकते हैं. यह एक प्रयास कई अन्य परिवारों के जीवन में नई उम्मीद और खुशियां लौटा सकता है.
भ्रांतियां और कानूनी अड़चनें दूर करने की आवश्यकता
समाज में अंगदान को लेकर आज भी कई तरह की झिझक और भ्रांतियां बनी हुई हैं. मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि जब तक लोग इसके वैज्ञानिक और मानवीय पहलू को नहीं समझेंगे, तब तक इस दिशा में बड़ा बदलाव मुश्किल है. उन्होंने कहा कि जागरूकता के साथ-साथ आम जनता को अंगदान से जुड़े कानूनी पहलुओं की सही और सरल जानकारी देना बेहद जरूरी है. राज्य सरकार इस दिशा में हर संभव प्रशासनिक और सामाजिक सहयोग देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने मोहन फाउंडेशन की इस कार्यशाला को एक बेहतरीन और दूरगामी पहल बताया.
चिकित्सा क्षेत्र में तकनीकी क्रांति और स्वस्थ झारखंड का संकल्प
बदलते दौर का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, कि आज की चिकित्सा प्रणाली पूरी तरह तकनीक आधारित हो चुकी है. चिकित्सा जगत में अब रोबोटिक ऑपरेशन्स से लेकर लिवर और किडनी जैसे जटिल ट्रांसप्लांट बेहद सुगमता से किए जा रहे हैं. उन्होंने भरोसा दिलाया कि झारखंड सरकार राज्य के हर नागरिक को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने और एक स्वस्थ झारखंड के निर्माण की दिशा में लगातार ठोस और सकारात्मक कदम उठा रही है.



