HC के आदेश के बाद दो पूर्व अंचल अधिकारियों के दंड आदेश रद्द

Ranchi: राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने उच्च न्यायालय के आदेशों और कानूनी समीक्षा के बाद दो झारखंड राज्य प्रशासनिक सेवा...

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Ranchi: राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने उच्च न्यायालय के आदेशों और कानूनी समीक्षा के बाद दो झारखंड राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों हेमा प्रसाद और प्रमोद राम के खिलाफ पूर्व में लगाए गए विभागीय दंड को विलोपित (रद्द) कर दिया है. यह निर्णय न्यायपालिका के निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है.

हेमा प्रसाद पर क्या था आरोप

हेमा प्रसाद पर जामताड़ा में पदस्थापना के दौरान (वर्ष 2014) मौजा-बुटबेरिया की एक मुकर्ररी स्वत्व की अहस्तांतरणीय जमीन को हस्तांतरण योग्य बताने से संबंधित गलत प्रतिवेदन जिला अवर निबंधक को भेजने का आरोप था. इसके आधार पर संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम, 1949 की धारा-20 का उल्लंघन कर भूमि का निबंधन किया गया था. इस कारण सरकार ने उनके दो वेतनवृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकने का दंड अधिरोपित किया गया था. इसके बाद हेमा प्रसाद ने इस दंड के खिलाफ झारखंड उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की थी. उच्च न्यायालय ने 21 अगस्त 2025 को अपने न्यायादेश में प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को बिना साक्ष्य साबित किए मुख्य आधार बनाने की प्रक्रियागत त्रुटि को मानते हुए दंडादेश को निरस्त कर दिया और 12 सप्ताह के भीतर सभी परिणामी लाभ देने का निर्देश दिया.

प्रमोद राम पर क्या था आरोप

प्रमोद राम पर कुंदा (चतरा) में अपने कार्यकाल के दौरान ग्राम डोकवा और पचम्बा में सर्वे खतियानी रैयतों से बिना किसी वैध संबंध के और नियमों के विरुद्ध नीलाम कंपनी के पक्ष में अवैध जमाबंदी व नामांतरण वाद स्वीकृत करने के आरोप थे. विभागीय कार्यवाही के बाद सरकार ने उनके तीन वेतनवृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकने का दंड दिया गया था, जिसे अपील में भी यथावत रखा गया था. प्रमोद राम ने इसके विरुद्ध उच्च न्यायालय में दायर किया. अदालत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि मामले में कोई गवाह प्रस्तुत न किए जाने पर दंड के आदेश को रद्द कर दिया. इसके बाद सरकार ने प्रमोज राम के विरुद्ध आरोपित असंचयात्मक प्रभाव से तीन वेतन वृद्धि पर रोक के दंड को भी विलोपित कर दिया है.

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