PM’s congratulations: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभालने पर एंडी बर्नहम को बधाई दी है. पीएम मोदी ने कहा कि भारत और ब्रिटेन साझा लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े हुए हैं और दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में मजबूत सहयोग है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक, रक्षा और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को लेकर व्यापक सहयोग है. इसी महीने सीईटीए के लागू होने के साथ भारत और ब्रिटेन की द्विपक्षीय साझेदारी और भी मजबूत होने की उम्मीद है. पीएम मोदी ने कहा कि वह एंडी बर्नहम के साथ मिलकर भारत-ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने तथा साझा विजन 2035 को आगे बढ़ाने के लिए काम करने को लेकर उत्साहित हैं.
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बर्नहम ने शासन व्यवस्था में व्यापक बदलाव का संकल्प लिया
पदभार संभालने के बाद अपने पहले संबोधन में बर्नहम ने देश में राजनीतिक स्थिरता बहाल करने और शासन व्यवस्था में व्यापक बदलाव लाने का संकल्प जताया. उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में बार-बार प्रधानमंत्री बदलने से लोगों का राजनीति पर भरोसा कमजोर हुआ है और अब नेताओं को बेहतर प्रदर्शन करना होगा. बकिंघम पैलेस से लौटने के बाद 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर अपने पहले संबोधन में बर्नहम ने कहा, मैं पूरी तरह महसूस करता हूं कि पिछले 10 वर्षों में इस सत्ता के गलियारे में सरकार बनाने के लिए आने वाला मैं छठा व्यक्ति हूं और 2016 के बाद सातवां प्रधानमंत्री हूं. यह आत्ममंथन और नए संकल्प का समय है. उन्होंने कहा कि उनकी पीढ़ी के नेताओं को अपनी जिम्मेदारियां बेहतर ढंग से निभानी होंगी. बर्नहम ने कहा कि ब्रिटेन को दुनिया को यह दिखाना होगा कि हम फिर से राजनीतिक स्थिरता हासिल कर सकते हैं. लोग राजनीति से निराश हो चुके हैं. मैं उनकी बात सुनता हूं और ईमानदारी से स्वीकार करता हूं कि हम उतना अच्छा काम नहीं कर पाए, जितना करना चाहिए था. अब हमें बेहतर करना होगा. उन्होंने अपनी सरकार को ‘ब्रिटेन के लिए सर्किट ब्रेकर’ बताते हुए कहा कि उनकी सरकार देश में पिछले 40 वर्षों के सबसे बड़े बदलाव लागू करेगी. ब्रिटेन को नए राजनीतिक और आर्थिक मॉडल की जरूरत है.
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उनकी सरकार सत्ता का विकेंद्रीकरण करेगी : एंडी बर्नहम
1980 के दशक का उल्लेख करते हुए बर्नहम ने कहा, उस दौर में लिए गए कुछ फैसलों के कारण राजनीतिक शक्ति का अत्यधिक केंद्रीकरण हुआ, आर्थिक नियंत्रण का निजीकरण हुआ और देश के कई औद्योगिक क्षेत्रों का पतन हो गया. इसके चलते अनेक इलाके आज भी पिछड़ेपन से जूझ रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार सत्ता का विकेंद्रीकरण करेगी और निर्णय लेने की ताकत देश के हर क्षेत्र तक पहुंचाएगी. साथ ही, आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं को अधिक मजबूत सार्वजनिक नियंत्रण में लाकर उन्हें आम लोगों के लिए फिर से किफायती बनाया जाएगा.
