Ranchi: झारखंड के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक नए और सुनहरे युग की शुरुआत होने जा रही है. अब झारखंड के सुदूर गांवों के आदिवासी, मूलवासी और गरीब परिवारों के होनहार बच्चे भी अमेरिका के विश्वस्तरीय चिकित्सा संस्थानों में पढ़ाई और रिसर्च कर सकेंगे. अमेरिका की प्रतिष्ठित जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी और झारखंड सरकार के बीच एक ऐतिहासिक शैक्षणिक सहयोग (एमओयू) अंतिम चरण में है. मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई सकारात्मक बैठक ने इस ग्लोबल ड्रीम के धरातल पर उतरने का रास्ता साफ कर दिया है.
अमेरिका में ट्रेनिंग लेकर लौटेंगे झारखंड के सुपर कॉप्स
इस समझौते के तहत झारखंड सरकार की स्कॉलरशिप योजना के जरिए मेधावी नर्सिंग, पैरामेडिकल और मेडिकल छात्रों को एक साल के प्रशिक्षण के लिए अमेरिका भेजा जाएगा. वहां वे आधुनिक चिकित्सा तकनीक, एडवांस नर्सिंग, रिसर्च और स्किल डेवलपमेंट का विश्वस्तरीय अनुभव प्राप्त करेंगे. खास बात यह है कि ये छात्र ट्रेनिंग के बाद वापस लौटकर झारखंड के सुदूर ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह हाईटेक और वैश्विक स्तर का बनाएंगे.
हेल्थ हब बनने की राह पर झारखंड
बैठक में पहुंचे जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी के निदेशक मिस्टर चार्ल्स आर. हैंकला ने झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था के बदलते चेहरे की खुलकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि झारखंड में स्वास्थ्य क्षेत्र की अपार संभावनाएं हैं. रिम्स-टू जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना को एशियन डेवलपमेंट बैंक का सहयोग मिलना राज्य की बड़ी उपलब्धि है. झारखंड बहुत जल्द भारत का एक प्रमुख हेल्थ हब बनने जा रहा है.
युवाओं के लिए खुला ग्लोबल कॉरिडोर
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इस कदम को मील का पत्थर बताते हुए कहा कि पिछले दो दशकों में युवाओं के भविष्य को लेकर ऐसी गंभीर पहल नहीं हुई थी. हेमंत सोरेन सरकार अब इन्वेस्टर्स मीट के सकारात्मक नतीजों के साथ युवाओं के लिए वैश्विक द्वार खोल रही है. यह महज एक कागजी समझौता नहीं, बल्कि झारखंड के युवाओं के रोजगार, आधुनिक चिकित्सा शिक्षा और वैश्विक पहचान की दिशा में उठाया गया सबसे मजबूत कदम है.
