Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने रांची जिले की चटवाल गांव स्थित भूमि विवाद से जुड़े एक अहम मामले में याचिकाकर्ता अमर कुमार चौधरी को राहत देते हुए 18 वर्ष पुरानी रिट याचिका का निपटारा कर दिया. न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने डिवीजनल कमिश्नर और अतिरिक्त कलेक्टर द्वारा पारित आदेशों को रद्द करते हुए वर्ष 1988 में पारित SAR आदेश को अंतिम और प्रभावी माना. कोर्ट ने कहा कि जिस भूमि का लेन-देन वर्ष 1947 में हुआ था, उसे लेकर पहली SAR कार्यवाही वर्ष 1986-87 में शुरू की गई थी. उस मामले में 26 अगस्त 1988 को आदेश पारित हुआ, जिसके आधार पर वैकल्पिक भूमि का पंजीकृत हस्तांतरण भी हुआ और म्यूटेशन भी कर दिया गया. इस आदेश को कभी चुनौती नहीं दी गई, इसलिए यह अंतिम रूप से प्रभावी हो गया. इसके बाद वर्ष 2006 में उसी विवाद को लेकर दोबारा SAR मामला दायर किया गया, जिसे पहले SAR अधिकारी ने खारिज कर दिया था. हालांकि अपीलीय प्राधिकारी ने 1988 के आदेश को भी रद्द कर दिया और डिवीजनल कमिश्नर ने उस फैसले को बरकरार रखा.
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हाईकोर्ट ने दोनों आदेशों को निरस्त कर दिया
हाईकोर्ट ने इन दोनों आदेशों को कानून के अनुरूप नहीं मानते हुए निरस्त कर दिया. हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में ‘रेस ज्यूडिकाटा’ (Res Judicata) और समय-सीमा (Limitation) के सिद्धांत स्पष्ट रूप से लागू होते हैं. अदालत ने कहा कि एक बार जिस विवाद का अंतिम निर्णय हो चुका हो, उसे वर्षों बाद दोबारा नहीं खोला जा सकता. साथ ही, इतने लंबे अंतराल के बाद दायर की गई बहाली की कार्रवाई भी उचित नहीं मानी जा सकती. अदालत ने इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के सीटू साहू और फूलचंद मुंडा मामलों के फैसलों का भी हवाला दिया. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में 28 जून 2008 के SAR अपील आदेश और 21 अक्टूबर 2008 के SAR रिवीजन आदेश को रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि 26 अगस्त 1988 का SAR आदेश अंतिम रूप से प्रभावी रहेगा. इसके साथ ही अमर कुमार चौधरी की रिट याचिका स्वीकार कर ली गई.
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