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रांची विश्वविद्यालय पहुंची राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा, ST छात्रों और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर हुई चर्चा

Ranchi: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा आज अपनी टीम के साथ रांची विश्वविद्यालय पहुंचीं. यहां उन्होंने कुलपति प्रो....

Ranchi University
कुलपति और विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करती डॉ. आशा लकड़ा

Ranchi: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा आज अपनी टीम के साथ रांची विश्वविद्यालय पहुंचीं. यहां उन्होंने कुलपति प्रो. सरोज शर्मा और विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर अनुसूचित जनजाति छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. बैठक में विश्वविद्यालय के अंदर आने वाले 35 कॉलेजों में एसटी छात्रों की संख्या, शोध कर रहे विद्यार्थियों की स्थिति, एसटी कर्मचारियों और शिक्षकों की नियुक्ति, प्रमोशन, वेतन निर्धारण, छात्रावास सुविधाएं और एसटी शिकायत निवारण सेल की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई. आयोग की टीम ने कई बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी मांगी, जिस पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने उपलब्ध जानकारी साझा की. जिन सूचनाओं का संकलन बाकी है, उन्हें जल्द उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया.

छात्र, शिक्षक या कर्मचारी अपनी शिकायत आयोग की वेबसाइट पर ऑनलाइन कर सकते हैं दर्ज

डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का उद्देश्य एसटी समुदाय के छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करना और उनकी शिकायतों का समाधान सुनिश्चित करना है. उन्होंने बताया कि कोई भी छात्र, शिक्षक या कर्मचारी अपनी शिकायत आयोग की वेबसाइट पर ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं. बैठक के दौरान डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि वह स्वयं भी रांची विश्वविद्यालय की छात्रा रही हैं और अपने पुराने विश्वविद्यालय आकर उन्हें गर्व महसूस हो रहा है. इस दौरान कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय जल्द ही पूर्व छात्रों का एक बड़ा मिलन समारोह आयोजित करने की तैयारी कर रहा है.

छात्रों की सुविधा के लिए एक वर्किंग हॉस्टल बनाने का सुझाव

डॉ. आशा लकड़ा ने विश्वविद्यालय में छात्रों की सुविधा के लिए एक वर्किंग हॉस्टल बनाने का सुझाव दिया. साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की छात्रवृत्ति योजनाओं की जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर प्रमुखता से उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक छात्र इसका लाभ उठा सकें. शिक्षकों की कमी और प्रोमोशन के मुद्दे पर उन्होंने कहा, कि आयोग इस संबंध में यूजीसी और संबंधित विभागों के साथ सकारात्मक बातचीत करेगा. उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि विश्वविद्यालय की जरूरतों के अनुसार आयोग हरसंभव सहयोग देने का प्रयास करेगा.

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