RANCHI: झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच अब केवल परामर्श और दवाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि जटिल सर्जरी के मामले में भी राज्य एक नए मुकाम पर है. आयुष्मान भारत योजना और सुदृढ़ होते सरकारी बुनियादी ढांचे के कारण अब गरीब और मध्यम वर्ग के लिए भी ऑपरेशन कराना सुलभ हो गया है. सरकार के अनुसार, झारखंड के सरकारी और निजी अस्पतालों में सर्जरी कराने वाले मरीजों की संख्या में 15 से 20 फीसदी की वार्षिक वृद्धि देखी गई है.
सर्जरी के आंकड़ों की वर्तमान स्थिति
झारखंड स्वास्थ्य विभाग और आयुष्मान भारत के अद्यतन ताजा आंकड़ों के अनुसार झारखंड में सालना चार लाख छोटी-बड़ी सर्जरी होती है। सरकारी अस्पताल जिसमें रिम्स, सदर अस्पताल और मेडिकल कॉलेज शामिल हैं, उनमें प्रसव, मोतियाबिंद, हड्डी रोड और सामान्य सर्जरी ढ़ाई लाख के करीब होगी है.सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में कार्डियक सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, लैप्रोस्कोपिक सर्जरी, कैंसर के जुड़ी बीमारियों के लिए 1.8 लाख सर्जरी होती है। इसमें आयुष्मान भारत योजना के तहत होने वाली सर्जरी का बड़ा हिस्सा है.
सरकारी अस्पतालों का दबदबा
रिम्स रांची, एमजीएम जमशेदपुर और धनबाद के एसएनएमएमसीएच जैसे बड़े संस्थानों में रोजाना औसतन 150 से 200 छोटी-बड़ी सर्जरी की जा रही हैं. मोतियाबिंद के ऑपरेशन और प्रसव संबंधी सर्जरी में सरकारी अस्पतालों की हिस्सेदारी 70 फीसदी से अधिक है.
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निजी अस्पतालों में विशेषज्ञता का रुझान
राज्य के निजी अस्पतालों में आधुनिक तकनीक जैसे रोबोटिक सर्जरी और मिनिमली इनवेसिव (कम चीरा) तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा है. आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध निजी अस्पताल में हृदय रोग, घुटने का प्रत्यारोपण और किडनी से संबंधित सर्जरी की संख्या तेजी से बढ़ी है.
क्यों बढ़ रहे हैं आंकड़े
- आयुष्मान भारत (70 साल से ऊपर को भी कवर): अब 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को भी 5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिलने से सर्जरी की संख्या में उछाल आने की उम्मीद है.
- बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर: झारखंड सरकार द्वारा 5 जिलों (धनबाद, जामताड़ा, गिरिडीह, देवघर और खूंटी) में पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेजों के अपग्रेडेशन से सर्जरी की क्षमता और बढ़ेगी.
- डॉक्टरों की नियुक्ति: हाल ही में राज्य सरकार नए डॉक्टरों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिससे ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों में भी छोटे ऑपरेशन संभव हो पाएंगे.
