Saraikela : जिला के चांडिल बांध में नौका विहार परिसर के सामने गार्ड वॉल की मरम्मत का काम विवादों में आ गया है. विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने काम की गुणवत्ता, पारदर्शिता और विस्थापितों की उपेक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. राकेश रंजन महतो ने कहा है कि जब भी चांडिल बांध में नौकायन का ठेका किसी बाहरी संस्था को देने की बात होती है, तो कुछ संगठन विस्थापितों के अधिकार की बात कर विरोध करते हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ नौकायन पर ही विस्थापितों का अधिकार है.
सभी कार्यों में विस्थापितों को प्राथमिकता मिलें
राकेश रंजन महतो ने कहा कि चांडिल बांध क्षेत्र में मरम्मत, सौंदर्यीकरण, निर्माण, रख रखाव जैसे सभी कार्यों में स्थानीय विस्थापितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. यह उनका नैतिक एवं वैधानिक अधिकार है. लेकिन गार्ड वॉल की मरम्मत बाहरी ठेकेदार से कराई जा रही है. उन्होंने कहा कि मानसून में तेज बारिश के बीच गार्ड वॉल की मरम्मत की जा रही है. सामान्यत सरकार वर्षा ऋतु में ऐसे कार्य स्थगित रखती है ताकि सीमेंट-कंक्रीट की गुणवत्ता प्रभावित न हो. लेकिन यहां पानी की लहरों के बीच ही निर्माण सामग्री का उपयोग हो रहा है.

विभाग बतायें काम किस योजना के तहत हो रहा
उन्होंने कहा कि निमार्ण कार्य सिर्फ कागजी खानापूर्ति कर राशि निकासी का माध्यम तो नहीं बन रहा. विभाग को पारदर्शिता के साथ बताना चाहिए कि यह काम किस योजना के तहत हो रहा है. इस संबंध में से फोन पर जानकारी ली गई. उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि उन्हें इस कार्य की कोई जानकारी नहीं है. आदित्यपुर के एक ठेकेदार से कराया जा रहा है. उनके अनुसार कोई सार्वजनिक निविदा जारी नहीं हुई और पहले रंग-रोगन का काम करने वाला ही ठेकेदार अब मरम्मत कर रहा है.
फाउंडेशन की मांग निष्पक्ष जांच करायें सरकार
विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो. कार्य की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराई जाए और खर्च, स्वीकृति एवं निविदा प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं. संगठन ने यह भी मांग की है कि भविष्य में चांडिल बांध क्षेत्र में होने वाले सभी विकास एवं मरम्मत कार्यों में स्थानीय विस्थापितों की प्राथमिकता सुनिश्चित की जाए. चांडिल बांध के विस्थापितों का आरोप है कि विकास कार्यों में उनकी लगातार उपेक्षा हो रही है.


