Saraikela : राज्य में सड़कों की बदहाली से लोग परेशान है. ऐसा ही हाल सरायकेला का है. जहां एनएच NH 33 और एनएच NH 32 की बदहाली से आवागमन प्रभावित है. प्रमुख हाईवे होने के कारण ओवरलोडेड वाहन भी इस मार्ग से गुजरते है. ऐसे में वाहन की क्षमता से 3 गुना अधिक माल लादकर दौड़ रहे हाईवा और टिप ट्रेलर आम लोगों के लिए काल बनते जा रहे हैं. परिवहन नियमों के अनुसार NH-33 और NH-32 पर किसी भी मालवाहक वाहन की अधिकतम क्षमता 18 टन निर्धारित है. लेकिन हकीकत में हाईवा में 15 टन की जगह 48 टन तक और टिप ट्रेलर में 40 टन की जगह 80 टन तक आयरन ओर लादकर सरपट दौड़ाया जा रहा है.
ओवरलोड के कारण सड़कें हो रही बदहाल
ओवरलोड के कारण न सिर्फ सड़कें कुछ ही महीनों में गड्ढों में तब्दील हो रही हैं, बल्कि वाहनों का नियंत्रण भी मुश्किल हो गया है. तेज रफ्तार और ब्रेक फेल होने से रोजाना छोटे-बड़े हादसे हो रहे हैं. राहगीरों और आम नागरिकों की जान जोखिम में है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि चेकिंग के नाम पर खानापूर्ति होती है. अंडर-लोड के बजाय ओवर-लोड वाहनों को खुलेआम अनुमति मिल रही है.
सड़कें टूटीं, दुर्घटनाएं बढ़ीं
ओवरलोड वाहनों के दबाव से NH-33 और NH-32 समेत जिला की कई सड़कें उखड़ गई हैं. जगह-जगह गड्ढे, उड़ती धूल और टूटे डामर से वाहन चालकों को दुर्घटना का डर हर पल सताता है. दोपहिया चालक और पैदल यात्री सबसे अधिक प्रभावित हैं.
आम जनता की मांग
लोगों का कहना है कि जब तक ओवरलोडिंग पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, सड़क दुर्घटनाएं और सड़कों की बदहाली नहीं रुकेगी. आम नागरिकों और राहगीरों ने जिला प्रशासन, आरटीओ, डीटीओ और ट्रैफिक पुलिस से मांग की है कि सभी प्रमुख चौक-चौराहों पर वजन कांटा लगाकर सघन जांच हो. ओवरलोड वाहनों पर भारी जुर्माना और वाहन जब्ती की कार्रवाई हो. पगड़ी व्यवस्था पर अंकुश लगाकर दोषी अधिकारियों-कर्मियों पर कार्रवाई हो.
