सरायकेला: 40 साल का इंतजार होगा खत्म ? चांडिल बांध विस्थापितों के दर्द पर सरकार का बड़ा कदम, 30 दिन में मांगी रिपोर्ट

Saraikela: चांडिल बहुउद्देशीय स्वर्णरेखा परियोजना से प्रभावित 116 गांवों के विस्थापित परिवारों की वर्षों से लंबित समस्याओं के समाधान को लेकर बुधवार...

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चांडिल बांध विस्थापितों की समस्याओं पर हाई लेवल बैठक

Saraikela: चांडिल बहुउद्देशीय स्वर्णरेखा परियोजना से प्रभावित 116 गांवों के विस्थापित परिवारों की वर्षों से लंबित समस्याओं के समाधान को लेकर बुधवार को साकची स्थित परिसदन भवन में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता झारखंड मानवाधिकार आयोग की विशेष प्रतिवेदक (सेवानिवृत्त आईएएस) सुचित्रा सिन्हा ने की.

116 गांवों की समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं

बैठक में विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने विस्थापितों की ओर से विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया. उन्होंने पुनर्वास स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं की कमी, लंबित मुआवजा, विकास पुस्तिका में त्रुटियां, प्लॉट आवंटन में देरी, भूमि पट्टा एवं म्यूटेशन, सरकारी योजनाओं का लाभ, स्वरोजगार और खनन में स्थानीय विस्थापितों की भागीदारी जैसे मुद्दे उठाए. उन्होंने कहा कि परियोजना को 40 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज भी हजारों विस्थापित परिवार अपने अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं.

मुआवजा और विकास कार्यों में तेजी लाने का आश्वासन

बैठक में अधिकारियों ने स्वीकार किया कि कई मामले वर्षों से लंबित हैं. संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करने का आश्वासन दिया गया. पुनर्वास स्थलों पर सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता देने, लंबित मुआवजा भुगतान करने तथा पात्र विस्थापितों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर सहमति बनी.इसके अलावा प्लॉट आवंटन और भूमि संबंधी विवादों के समाधान के लिए विशेष शिविर लगाने का भी निर्णय लिया गया.

मानवाधिकार आयोग ने दिए सख्त निर्देश

विशेष प्रतिवेदक सुचित्रा सिन्हा ने कहा कि पुनर्वास केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं होना चाहिए. विस्थापित परिवारों को सम्मानजनक जीवन, भूमि का अधिकार, आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं का समान लाभ मिलना चाहिए. उन्होंने सभी विभागों को संवेदनशीलता के साथ कार्य करते हुए मामलों का समयबद्ध और विधिसम्मत समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.

30 दिनों में मांगी गई कार्रवाई रिपोर्ट

बैठक में सभी संबंधित विभागों को 30 दिनों के भीतर लंबित मामलों की सूची तैयार कर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने और पुनर्वास स्थलों पर विकास कार्यों को युद्धस्तर पर शुरू करने का निर्देश दिया गया.

विस्थापित संगठनों ने जताई उम्मीद

विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन ने बैठक आयोजित करने और समस्याओं को गंभीरता से सुनने के लिए झारखंड मानवाधिकार आयोग तथा सभी अधिकारियों का आभार जताया. संगठन ने उम्मीद व्यक्त की कि बैठक में लिए गए फैसले जल्द धरातल पर दिखाई देंगे और विस्थापित परिवारों को उनका अधिकार और न्याय मिलेगा.

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