विनोबा भावे विश्वविद्यालय में बड़े अधिकारियों ने खेला भाई-भतीजावाद का घिनौना खेल

Hazaribagh: विनोबा भावे विश्वविद्यालय में तत्कालीन और वर्तमान के विभिन्न पदों पर कार्यरत कर्मियों और पदाधिकारियों द्वारा अपने रिश्तेदारों को बिना आधार...

Hazaribagh: विनोबा भावे विश्वविद्यालय में तत्कालीन और वर्तमान के विभिन्न पदों पर कार्यरत कर्मियों और पदाधिकारियों द्वारा अपने रिश्तेदारों को बिना आधार और अहर्ता के विभिन्न स्थानों पर नौकरी देने के संकेत मिले हैं.

रिश्तेदारों की नियुक्ति पर सवाल

इस गंभीर मामले को लेकर चंदन सिंह ने कुलपति को पत्र लिखकर पूरे मामले में जांच करवाने का आग्रह किया है.

पत्र में लगाए गए आरोप

पत्र में चंदन सिंह ने बताया है कि पहले जहां कुलपति कार्यालय के एक कर्मी द्वारा अपनी पत्नी को एक विभाग में बिना अहर्ता के नौकरी देने का मामला कुलपति के संज्ञान में लाया गया था, वहीं अब महिला महाविद्यालय के विभिन्न स्वपोषित विभागों, विधि महाविद्यालय और विश्वविद्यालय के कई अन्य स्वपोषित विभागों में भी ऐसे कई कर्मी और शिक्षक कार्यरत हैं, जिनकी नियुक्ति के लिए या तो आवेदन आमंत्रित नहीं किए गए या बिना किसी पैनल के ही नियुक्ति कर दी गई.

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विश्वविद्यालय की छवि पर असर

चंदन सिंह ने बताया कि लगातार इस प्रकार के आरोप लगने से विनोबा भावे विश्वविद्यालय की छवि धूमिल हो रही है. साथ ही यह भी प्रतीत होता है कि ऐसे मामलों में विश्वविद्यालय प्रशासन अक्सर कार्रवाई करने से बचता रहा है.

जांच और कार्रवाई की मांग

पत्र में यह भी आग्रह किया गया है कि जिन स्वपोषित विभागों में वर्षों से शिक्षकों, कर्मियों और प्राचार्यों की नियुक्ति नहीं हुई है, वहां तत्काल नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाए. वहीं जिन शिक्षकों या कर्मियों की नियुक्ति अवैध है या परिवारवाद के आधार पर हुई है, उन्हें तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाए.

उच्च शिक्षा विभाग को भी भेजी गई प्रति

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्र की प्रति उच्च शिक्षा विभाग को भी भेजी गई है.

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