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सोनम वांगचुक के इलाज पर अदालती मुहर, पर इच्छा के खिलाफ नहीं दी जा सकती दवा

News Wave Desk: लद्दाख की संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक...

News Wave Desk: लद्दाख की संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के इलाज को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने बेहद संवेदनशील रुख अपनाया है. वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से प्राइवेट अस्पताल (मेदांता) में ट्रांसफर करने की उनकी पत्नी की याचिका पर रविवार को हुई विशेष सुनवाई में कोर्ट ने साफ किया कि हर जीवन कीमती है. हालांकि, कोर्ट ने सरकार के अस्पताल में भर्ती कराने के फैसले को सही माना, लेकिन वांगचुक की मर्जी के बिना उन पर जबरन कोई इलाज थोपने से भी इंकार कर दिया है.

सिब्बल की दलील, मरीज कोई कैदी नहीं, इलाज चुनने का अधिकार मिले

वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंगमो की ओर से पेश हुए देश के दिग्गज वकील कपिल सिब्बल ने अदालत में तीखी दलीलें दीं. सिब्बल ने कहा कि वांगचुक कोई हिरासत में लिए गए अपराधी नहीं हैं, वह देश के स्वतंत्र नागरिक हैं. यदि वे इलाज चाहते हैं, तो उन्हें अपनी पसंद के निजी अस्पताल में जाने की अनुमति मिलनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि सफदरजंग अस्पताल में वांगचुक के निजी डॉक्टरों और वकीलों को उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा है.

18 दिन का उपवास और कीटोन्स का बढ़ता स्तर

दूसरी तरफ, केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कोर्ट को वांगचुक की मेडिकल स्थिति से अवगत कराया. उन्होंने दलील दी कि चिलचिलाती उमस में 18 दिनों तक भूखे रहने के कारण वांगचुक का शरीर कीटोसिस की गंभीर स्थिति में पहुंच रहा है, जिससे अंगों के फेल होने का खतरा है. एएसजी ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि सफदरजंग और एम्स के बेहतरीन डॉक्टर्स की टीम उनकी देखरेख कर रही है और उनकी पत्नी को चौबीसों घंटे उनसे मिलने की छूट है.

जबरन इलाज पर रोक, 3 दिन में मांगी रिपोर्ट

जस्टिस मिनी पुष्करणा की पीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद एक बेहद संतुलित आदेश जारी किया. कोर्ट ने कहा कि जब सरकारी डॉक्टर्स की टीम पूरी मुस्तैदी से निगरानी कर रही है, तो सरकार के इस कदम को अनुचित या मनमाना नहीं कहा जा सकता. हालांकि, कपिल सिब्बल की आपत्ति के बाद कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि वांगचुक को दवाएं केवल उनकी सहमति से ही दी जा सकती हैं, जबरन नहीं. कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 3 दिनों के भीतर वांगचुक की विस्तृत मेडिकल स्टेटस रिपोर्ट तलब की है.

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