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सुजलाम झारखंड 2026: पानी बचाने की मुहिम में एक साथ आए किसान, वैज्ञानिक, सरकार और उद्योग जगत

Ranchi: झारखंड में जल संकट और भविष्य की जल सुरक्षा को लेकर राजधानी रांची में “सुजलाम झारखंड 2026” सम्मेलन का आयोजन किया...

Ranchi: झारखंड में जल संकट और भविष्य की जल सुरक्षा को लेकर राजधानी रांची में “सुजलाम झारखंड 2026” सम्मेलन का आयोजन किया गया. इस एक दिवसीय सम्मेलन में सरकार, वैज्ञानिकों, किसानों, उद्योग जगत और सामाजिक संगठनों ने मिलकर जल संरक्षण के लिए साझा रणनीति पर मंथन किया. कार्यक्रम का आयोजन सस्टेनेबल कॉमर्स फोरम (SCF) द्वारा किया गया, जबकि इसके संयोजक ओम प्रकाश और संकेत कुमार रहे. सम्मेलन की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुई. कार्यक्रम में झारखंड सरकार के जल संसाधन एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. वहीं पद्मश्री से सम्मानित उमाशंकर पांडे और बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस.सी. दुबे विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे.

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जल सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता: हफीजुल हसन

मंत्री हफीजुल हसन ने अपने संबोधन में कहा कि झारखंड सरकार जल संरक्षण को लेकर गंभीर है और राज्य में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पानी सबसे बड़ी चुनौती बनने वाला है, इसलिए अभी से ठोस कदम उठाने की जरूरत है.

पानी की हर बूंद की कीमत समझनी होगी

पद्मश्री उमाशंकर पांडे ने कहा कि जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार है. उन्होंने लोगों से अपील की कि पानी की बर्बादी रोकने और जल स्रोतों को बचाने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभानी होगी. वहीं प्रो. एस.सी. दुबे ने कहा कि जल प्रबंधन में विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिक संस्थानों और आम लोगों की भागीदारी बेहद जरूरी है. उन्होंने सुझाव दिया कि झारखंड में जल संरक्षण से जुड़ी सीएसआर परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि गांवों तक बेहतर जल प्रबंधन की व्यवस्था पहुंच सके.

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आधुनिक तकनीक और “स्पंज सिटी” मॉडल पर चर्चा

सम्मेलन में तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें जल संरक्षण की नई तकनीकों और टिकाऊ विकास मॉडल पर विस्तार से चर्चा हुई. पहले सत्र में “पठारी जल विज्ञान और स्पंज सिटी डिजाइन” विषय पर विशेषज्ञों ने बताया कि शहरों को इस तरह विकसित करने की जरूरत है, जिससे बारिश का पानी जमीन में समा सके और भूजल स्तर बेहतर हो. दूसरे सत्र में आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञ पिनाकी दासगुप्ता ने कृषि और सिंचाई में आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया. उन्होंने बताया कि नई तकनीकों के जरिए कम पानी में बेहतर खेती संभव है. इस दौरान नाबार्ड और जेएसएलपीएस जैसी संस्थाओं की भूमिका पर भी चर्चा हुई.

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