विनीत आभा उपाध्याय
Ranchi: दशकों पहले रांची में कुख्यात रहे सुरेंद्र सिंह रौतेला उर्फ सुरेंद्र बंगाली ने अपनी रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटया है. सुरेंद्र बंगाली ने सुप्रीम कोर्ट में अपने अधिवक्ता के माध्यम से याचिका दायर कर झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें सुरेंद्र बंगाली की रिहाई(प्री मेच्योर रिलीज) के लिए राज्य सरकार को छह महीने के अंदर विचार करने का निर्देश दिया गया था.

तीन बार हाईकोर्ट पहुंचे थे सुरेंद्र बंगाली
सुप्रीम कोर्ट से पहले सुरेंद्र बंगाली ने तीन बार अपनी रिहाई के लिए झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटटखटाया था. उसकी याचिका पर हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की कोर्ट में सुनवाई हुई थी. सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को यह निर्देश दिया था कि 1984 में बनी निति के आधार पर सुरेंद्र बंगाली को सजा पूरी करने और अन्य तथ्यों को देखते हुए रिहा (प्री मेच्योर रिलीज) करने पर छह महीने में विचार करे.
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सुप्रीम कोर्ट ने फांसी को बदला था उम्रकैद में
दरअसल रांची सिविल कोर्ट ने लालपुर थाना के कांड संख्या-31/1996 में हत्या से जुड़े मामले में सुरेंद्र सिंह बंगाली को दोषी करार देने के बाद सुरेंद्र बंगाली को फांसी की सजा सुनायी थी. लेकिन इस बीच वर्ष 2001 में सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र बंगाली की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था. जिसके बाद से सुरेंद्र बंगाली जेल की सलाखों के पीछे है. करीब 25 साल से ज्यादा समय तक अपने जुर्म की सजा काटने के बाद सुरेंद्र बंगाली ने अपनी रिहाई के लिए शीर्ष अदालत में गुहार लगाई है. राज्य सजा पुनरीक्षण बोर्ड ने सुरेंद्र बंगाली की रिहाई के आवेदन पर निर्णय नहीं लिया गया था और उसकी रिहाई की मांग ठुकरा दी गई थी.
