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‘हनीट्रैप’ का डिजिटल अवतार: 60 रुपये प्रति मिनट का गंदा खेल, अश्लील वीडियो चैट से युवा रोज गवां रहे 10 हजार   

Ajay dayal Ranchi : क्या आप भी अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए किसी अज्ञात वीडियो चैट करने के लिए ऐप...

Ajay dayal

Ranchi : क्या आप भी अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए किसी अज्ञात वीडियो चैट करने के लिए ऐप पर रीचार्ज कर रहे हैं? सावधान हो जाइए! जिसे आप मनोरंजन या टाइमपास समझ रहे हैं, वह दरअसल ‘हनीट्रैप’ का नया और कानूनी चोला ओढ़े एक ऐसा खूंखार दलदल है, जो न सिर्फ आपकी जेब खाली कर रहा है, बल्कि आपको मानसिक रोगी भी बना रहा है. रांची सहित पूरे देश में इन दिनों ‘Velio’ जैसे दर्जनों ऐप्स का जाल फैला हुआ है, जहां चंद मिनटों की अश्लील बातों और वीडियो कॉल्स के लिए युवा अपनी गाढ़ी कमाई पानी की तरह बहा रहे हैं. इस अकेलेपन को भुनाकर कंपनियां करोड़ों कमा रहीं हैं. 

रीचार्ज का मायाजाल, 14 से 70 साल वाले शिकार

ये ऐप्स दिखने में बेहद सामान्य डेटिंग प्लेटफॉर्म्स जैसे लगते हैं, लेकिन इनके भीतर का सच बेहद डरावना है. इन ऐप्स पर बात करने की कीमत 15 से लेकर 60 रुपये प्रति मिनट तक वसूली जाती है. भुगतान के लिए कोई भी ऑनलाइन रीचार्ज एप्प का इस्तेमाल होता है. चौंकाने वाली बात यह है कि इस लत के शिकार सिर्फ युवा ही नहीं, बल्कि 14 साल के नाबालिग से लेकर 70 साल के बुजुर्ग तक हो रहे हैं. एक अनुमान के मुताबिक, इस लत में डूबे लोग रोजाना 3,000 से 10,000 रुपये तक इन ऐप्स पर उड़ा रहे हैं, जिससे इन कंपनियों की महीने की कमाई करोड़ों में पहुंच चुकी है.

सिर्फ आपकी जेब काटने का प्लान

इस पूरे खेल की क्रोनोलॉजी को समझें, तो इसमें लड़की को सामने से कॉल करने की अनुमति नहीं होती. यूजर को ही पैसे देकर कॉल लगानी पड़ती है. स्क्रीन के दूसरी तरफ बैठी लड़कियां सिर्फ एक तय कमीशन पर काम करती हैं. उनका मकसद कोई रिश्ता बनाना नहीं, बल्कि यूजर को अपनी मीठी और अश्लील बातों में फंसाकर ज्यादा से ज्यादा देर तक कॉल पर टिकाए रखना होता है, ताकि मीटर घूमता रहे और पैसे कटते रहें.

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ग्राउंड रियलिटी टेस्ट: 6 मिनट की कीमत 300 रुपये

जब इस नेटवर्क की पड़ताल के लिए ‘Velio’ ऐप को डाउनलोड कर 300 रुपये का रीचार्ज किया गया, तो महज 6 मिनट में ही पूरे पैसे साफ हो गए. इस दौरान सिर्फ अश्लील बातें और गंदी वीडियो कॉल का झांसा दिया गया. यह साफ करता है कि यह एक सोची-समझी डिजिटल ठगी है.

स्क्रीन-रोमांस के झांसे से बाहर निकलें 

युवा पीढ़ी को यह समझना होगा कि इस दुनिया में ‘मुफ्त या सस्ते’ के नाम पर परोसा जा रहा स्क्रीन-रोमांस सिर्फ एक छलावा है. यह एक ऐसी मानसिक लत (Digital Addiction) है, जिसका कोई मेडिकल इलाज नहीं है. यह आपके आत्मसम्मान, प्राइवेसी और भविष्य को दीमक की तरह चाट रही है.

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