NewswaveDesk: महाभारत की कथा के अनुसार जब श्री कृष्ण दुर्योधन के सभा में शांति दूत बनकर जाते हैं ऑर वहां पांडवों के तरफ से पांच गांव की मांग करते हैं. लेकिन अहंकारी दुर्योधन ने पांच गांव देने से मना कर देता है. इसके बाद क्या हुआ हम सब जानते हैं, महाभारत का विनाशकारी युद्ध. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज के समय में वह पांच गांव कहां स्थित हैं ऑर उनके नाम क्या हैं? आइए जानते हैं रोचक ऑर अनजाना इतिहास.
जब पांडवों को हस्तिनापुर से निकाला गया था, तो उन्होनें इंद्रप्रथ को अपना राजधानी बनाया था. पौराणिक मानयताओं के अनुसार इंद्रप्रस्थ पहले खांडवप्रस्थ था, जिससे पांडवों ने विकसित किया था.
ये रहे पांच गांवों के नाम
व्याघ्रपथ
पहला गांव व्याघ्रपथ, जिसे आज बागपत के नाम से जाना जाता है. व्याघ्र का अर्थ होता है बाघ, ऑर कहा जाता है कि यहां प्राचीन समय में बाघ पाया था.
स्वर्णप्रस्थ
दूसरा गांव स्वर्णप्रस्थ, जिसे आज के समय में सोनीपत कहा जाता है. यह हरियाणा के प्रमुख शहर है.
पांडुप्रस्थ
तीसरा गांव पांडुप्रस्थ, जिसे आज पानीपत के नाम से जाना जाता है. यह स्थान नई दिल्ली से करीब 90 किलोमीटर दूर है. इसके पास में ही कुरुक्षेत्र स्थित है, जहां महाभारत का विनाशकारी युद्ध हुआ था.
तिलप्रस्थ
चौथा गांव तिलप्रस्थ है. जिससे आज फरीदाबाद को तिलपत कहा जाता है. यह स्थान बहुत प्राचीन है.
कुरुक्षेत्र
कुरुक्षेत्र हरियाणा का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है. यहां भगवान श्री कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया था. यह क्षेत्र पूरा 48 कोस में फैला है.
महाभारत के सबसे महत्वपूर्ण स्थान हस्तिनापुर को माना जाता है. जहां कौरवों की राजधानी हुआ करती थी. आज हस्तिनापुर उत्तरप्रदेश के मेरठ में स्थित है.



