Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने सेवा कानून के एक महत्वपूर्ण पहलू पर स्पष्टीकरण देते हुए एक फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह निर्धारित किया है कि निलंबन अवधि का पूरा वेतन केवल तभी दिया जा सकता है जब कर्मचारी पूरी तरह दोषमुक्त हो जाए या फिर निलंबन की कार्रवाई पूरी तरह से अनुचित पाई जाए.
बहाली के बाद भी नहीं मिला पूरा वेतन
कोर्ट ने कहा है कि सरकारी कर्मचारी निलंबन की अवधि के पूर्ण वेतन और भत्तों का हकदार तभी होता हैजब उसे विभागीय जांच या अदालती कार्यवाही में पूर्ण सम्मान के साथ दोषमुक्त कर दिया गया हो. यह मामला एक कर्मचारी से संबंधित था जिसे विभागीय कार्यवाही के दौरान निलंबित कर दिया गया था. हालांकि बाद में उसे सेवा में बहाल कर दिया गया लेकिन निलंबन की अवधि को ड्यूटी के रूप में नहीं माना गया और उसे केवल निर्वाह भत्ता ही दिया गया.
याचिकाकर्ता ने की थी पूरी वेतन की मांग
जिसके बाद याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि उसे उस पूरी अवधि का वेतन मिलना चाहिए. कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि अगर किसी कर्मचारी को संदेह का लाभ देकर छोड़ा जाता है तो वह पूर्ण वेतन का दावा नहीं कर सकता. अदालत ने कहा कि यदि रिकॉर्ड से यह सिद्ध होता है कि निलंबन की कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण या पूरी तरह से अनुचित थी तभी प्रशासन को पूर्ण वेतन भुगतान करने का निर्देश दिया जा सकता है.
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