Jamshedpur : विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पूर्वी सिंहभूम जिले के सुंदरनगर प्रखंड अंतर्गत तुरामडीह गाँव में ग्रामीणों ने पर्यावरण संरक्षण की अनुकरणीय मिसाल पेश की. गांववासियों ने स्वयं जागरूकता अभियान चलाकर वृक्ष संरक्षण, जल संचयन और प्लास्टिक मुक्त गांव का संदेश दिया. सुबह से ही गांव के महिला मंडल, युवा समिति और स्कूली बच्चों ने प्रभात फेरी निकाली. “पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ” और “जल है तो कल है” जैसे नारों से पूरा गांव गूंज उठा. अभियान के दौरान ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से गांव के स्कूल परिसर, पंचायत भवन और सड़क किनारे नीम, पीपल, बरगद, आम एवं जामुन के 200 से अधिक पौधे रोपे. प्रत्येक पौधे की सुरक्षा के लिए बांस के ट्री-गार्ड भी लगाए गए.

ग्रामीणों ने खुद संभाली जिम्मेदारी
ग्राम प्रधान सुमित्रा महतो ने बताया, “हमारे पूर्वज जंगल को देवता मानते थे. लेकिन अब विकास के नाम पर पेड़ काटे जा रहे हैं. गर्मी बढ़ रही है, पानी का स्तर गिर रहा है. इसलिए हमने तय किया कि अब हम खुद ही अपने गांव को हरा-भरा बनाएंगे. हर परिवार एक पेड़ गोद लेगा और उसके बड़े होने तक देखभाल करेगा.” युवा समिति के सदस्य प्रकाश सरदार ने कहा कि गांव में हर महीने के पहले रविवार को ‘स्वच्छता एवं वृक्षारोपण दिवस’ मनाया जाएगा. साथ ही सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है. बच्चों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जंगल बचाने का संदेश दिया.
प्रशासन ने सराहा
मौके पर पहुंचे सुंदरनगर के प्रखंड विकास पदाधिकारी संजय कुमार ने ग्रामीणों के इस प्रयास की सराहना की. उन्होंने कहा, “तुरामडीह गांव ने साबित कर दिया कि सरकारी योजनाओं के बिना भी जनभागीदारी से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है. यह पूरे जिले के लिए प्रेरणा है.” उन्होंने मनरेगा के तहत गांव में चेक डैम निर्माण का आश्वासन भी दिया. ग्रामीणों का कहना है कि पर्यावरण हमारा भविष्य है, इसलिए इसे बचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है. तुरामडीह गांव के इस प्रयास ने पूरे इलाके में सकारात्मक संदेश दिया है और अन्य गांवों को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया है.
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