Newswave Desk: अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य हमलों के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में तनाव बढ़ गया है. निवेशकों को आशंका है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की आपूर्ति बाधित होती है, तो दुनिया भर में कच्चे तेल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला.
तेल की कीमतों में 4% तक की बढ़ोतरी
तनाव बढ़ने के बीच अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 4% बढ़कर 79–80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी करीब 4% की तेजी के साथ 74–75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में हालात और बिगड़ते हैं, तो तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है.
क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है. वैश्विक समुद्री तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. ऐसे में इस मार्ग में किसी भी प्रकार की रुकावट का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर तुरंत पड़ सकता है.
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भारत समेत दुनिया पर क्या होगा असर?
तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से भारत जैसे आयात-निर्भर देशों का आयात बिल बढ़ सकता है. इसके साथ ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ने, महंगाई में इजाफा होने और शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव की संभावना भी बढ़ सकती है. यदि क्षेत्रीय तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है.
