Hazaribagh: यूनिसेफ ने नव भारत जागृति केंद्र के सहयोग से सोमवार को होटल कैनेरी इन, हजारीबाग में बाल अधिकार विषयक शिक्षक कार्यशाला का आयोजन किया. कार्यशाला में जिले के छह प्रखंडों-इचाक, कटकमदाग, चुरचू, हजारीबाग सदर, कटकमसांडी और चौपारण के 60 सरकारी विद्यालयों के 60 शिक्षक एवं प्रधानाध्यापक शामिल हुए. इसके अलावा बीईईओ, बीपीओ और एपीओ ने भी कार्यक्रम में भाग लिया.
बाल अधिकारों की समझ को मजबूत करने पर जोर
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को बाल अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाना और उन्हें ऐसे ज्ञान व कौशल से सशक्त करना था, जिससे वे अपने विद्यालयों में बच्चों के अधिकारों के संरक्षण और संवर्धन में प्रभावी भूमिका निभा सकें. साथ ही सुरक्षित, समावेशी और बाल हितैषी विद्यालयी वातावरण विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया.

बाल संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा
यूनिसेफ एवं नव भारत जागृति केंद्र के विशेषज्ञों ने तकनीकी प्रस्तुतियों के माध्यम से बाल अधिकार, बाल संरक्षण, बाल विवाह, बाल श्रम, बच्चों के विरुद्ध हिंसा तथा बच्चों के लिए सुरक्षित एवं अनुकूल विद्यालयी वातावरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी. शिक्षकों को यह भी बताया गया, कि वे विद्यार्थियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक कर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं.
“शिक्षक निभा सकते हैं सबसे महत्वपूर्ण भूमिका”
नव भारत जागृति केंद्र के सचिव सतीश गिरिजा ने कहा, कि बाल अधिकारों को सुरक्षित बनाने में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि शिक्षक अपने विद्यालयों को बाल हितैषी बनाकर प्रत्येक बच्चे के जीवन, विकास, सुरक्षा और सहभागिता जैसे चार प्रमुख अधिकारों को सुनिश्चित करने में अहम योगदान दे सकते हैं.
शिक्षकों को मिलेगा व्यवहारिक लाभ
कार्यक्रम में एपीओ अजय कुंडु ने यूनिसेफ और नव भारत जागृति केंद्र का आभार व्यक्त करते हुए कहा, कि इस कार्यशाला से शिक्षकों को बाल अधिकारों की गहन समझ विकसित करने और बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी.
बीईईओ ने भी रखे विचार
हजारीबाग सदर एवं इचाक के बीईईओ राकेश कुमार तथा चुरचू एवं कटकमसांडी के बीईईओ विजय राम ने भी शिक्षकों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा, कि विद्यालयों में बाल अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है.
बच्चों के लिए सुरक्षित और समावेशी स्कूल बनाने का संकल्प
कार्यशाला के माध्यम से शिक्षकों की बाल अधिकार एवं बाल संरक्षण संबंधी समझ और क्षमता को मजबूत किया गया. इससे वे अपने-अपने विद्यालयों में बच्चों के अधिकारों की रक्षा, बाल विवाह, बाल श्रम और बच्चों के विरुद्ध हिंसा जैसी समस्याओं की रोकथाम के साथ सुरक्षित, समावेशी और बाल हितैषी विद्यालयी वातावरण तैयार करने में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे.
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