Ranchi: झारखंड में राज्यसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है, लेकिन सूबे के सियासी सूरमाओं की हालत ऐसी है जैसे परीक्षा सिर पर हो और सिलेबस का पता न हो. नामांकन की आखिरी तारीख 8 जून है, लेकिन इंडिया’ गठबंधन और एनडीए, दोनों खेमों में सस्पेंस का ऐसा थ्रिलर चल रहा है कि सस्पेंस थ्रिलर फिल्में भी शरमा जाएं. कांग्रेस बेचारी हमेशा की तरह वेट एंड वॉच की मुद्रा में योग मुद्रा लगाए बैठी है, तो झारखंड मुक्ति मोर्चा अपने पत्ते नहीं खोले हैं. उधर भाजपा का अपना अलग स्वैग है. उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष के आने का इंतजार है.6 जून को दिल्ली से हुक्म आएगा, तब जाकर कोई नाम सामने आएगा. लेकिन, इस सन्नाटे को चीरते हुए राजनीति के अखाड़े में एक ऐसे योद्धा की एंट्री हुई है, जिसने बड़े-बड़े दिग्गजों के चश्मे का नंबर बदल दिया है. बिना किसी तामझाम के, निर्दलीय ‘सूरमा’ रवि कुमार यादव उर्फ रवि पीटर ने पहला नामांकन पत्र खरीदकर वीआईपी गलियारों में खलबली मचा दी है.

जेब खाली, हौसला भारी: 10 विधायकों का जुगाड़ या बस दिल की तसल्ली
राज्यसभा जाने के लिए तो करोड़ों का खेल और विधायकों की पूरी फौज चाहिए, तो पलामू के रहने वाले रवि पीटर के पास क्या है? जवाब है—’जल, जंगल, जमीन’ का नारा और अटूट भरोसा. जब पत्रकारों ने उनसे पूछा, फॉर्म तो ले लिया, पर प्रस्तावक के रूप में 10 विधायकों के दस्तखत कहां से लाओगे?तो पीटर बड़े ही मासूम और चुटीले अंदाज में कहा मैंने आधा दर्जन विधायकों से बात कर ली है. उनसे कहा है कि इस बार नोटों की गड्डियों वाले धनकुबेरों को छोड़ो और जल-जंगल-जमीन की लड़ाई लड़ने वाले इस गरीब नौजवान का साथ दो. मुझे पूरा भरोसा है कि विधायकों की अंतरात्मा जागेगी और वे मुझे समर्थन देंगे.
भाजपा दफ्तर का चक्कर और करारा तमाचा मारने की कसम
राजनीति के इस सबसे महंगे खेल में रवि पीटर का दावा है कि वह पिछले 26 सालों से चल रही ‘पैसे फेंको, सीट जीतो’ की परिपाटी को बदल देंगे. वह भाजपा कार्यालय की चौखट भी चूम आए हैं और अन्य दलों के दरवाजे भी खटखटा रहे हैं. उनका कहना है, मेरे पास पैसा नहीं है, और न ही मैं लेन-देन में विश्वास रखता हूं. अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या झारखंड के माननीय विधायक पैसों की चमक’ छोड़कर रवि पीटर की मंशा और नीयत पर रीझते हैं, या फिर यह पूरी कवायद सिर्फ धनकुबेरों के गाल पर एक काल्पनिक ‘करारा तमाचा बनकर ही रह जाएगी.राजनीति में चमत्कार होते हैं, लेकिन क्या इतने बड़े? खैर, तमाशा शुरू हो चुका है, बस 8 जून का इंतजार कीजिए.
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