अमावस्या के दिन को हिंदू धर्म में खास महत्व दिया जाता है. यह दिन शांति, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक संतुलन का प्रतीक माना जाता है. खासतौर पर वैशाख अमावस्या को पितरों की शांति, दान और पुण्य कर्मों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस साल वैशाख अमावस्या की तारीख को लेकर लोगों में थोड़ी भ्रम की स्थिति है, ऐसे में पहले इसकी सही तारीख और समय जान लेते हैं.
वैशाख अमावस्या 2026: तारीख और तिथि समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 16 अप्रैल 2026 को रात 8:11 बजे शुरू होगी और 17 अप्रैल 2026 को शाम 5:21 बजे समाप्त होगी. अमावस्या का व्रत सूर्योदय के आधार पर माना जाता है, इसलिए वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी.
शुभ मुहूर्त: स्नान और दान का सही समय
इस दिन सुबह का समय सबसे अधिक शुभ माना जाता है.
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ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:25 बजे से 5:09 बजे तक
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सूर्योदय: सुबह 5:54 बजे
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अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:47 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है, वहीं अभिजीत मुहूर्त में दान और पूजा करना फलदायी होता है.
वैशाख अमावस्या के दिन क्या करें?
इस दिन की शुरुआत सुबह जल्दी उठकर करनी चाहिए. स्नान का विशेष महत्व होता है. यदि संभव हो तो पवित्र नदी में स्नान करें, अन्यथा घर पर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी शुभ माना जाता है.
स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लें. इसके बाद तांबे के पात्र से सूर्य देव को जल अर्पित करें.
इस दिन पितरों के लिए तर्पण करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता है कि इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और पितृ दोष कम होता है.
इसके अलावा जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और दान देना भी बहुत पुण्यदायी माना जाता है. यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि सेवा और संवेदना का प्रतीक है.
वैशाख अमावस्या पर क्या न करें?
इस दिन नए कार्य की शुरुआत या कोई बड़ा निवेश करने से बचना चाहिए. अमावस्या का दिन मुख्य रूप से साधना, शांति और दान के लिए होता है, इसलिए इसे सादगी और श्रद्धा के साथ बिताना ही उचित माना जाता है.
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