Hazaribagh : हजारीबाग जिले की छात्र राजनीति में एक बार फिर नई सक्रियता देखने को मिल रही है. झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेकेसीएम) की छात्र इकाई झारखंड क्रांतिकारी छात्र मोर्चा ने हजारीबाग में अपने संगठन विस्तार की औपचारिक शुरुआत कर दी है. शहर के युवराज पैलेस में आयोजित बैठक में बिनोबा भावे यूनिवर्सिटी से जुड़े 15 सक्रिय छात्रों की प्रारंभिक टीम का गठन किया गया. संगठन ने इन छात्रों को जिलेभर में छात्र विंग को मजबूत करने और युवाओं को संगठन से जोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी है.

नेताओं की मौजूदगी में बनी रणनीति
बैठक में संगठन के केंद्रीय संरक्षक, छात्र संघ के केंद्रीय संयोजक और कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. मांडू विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी बिहारी महतो भी विशेष रूप से बैठक में शामिल हुए. नेताओं ने कहा कि जेकेसीएम की वैचारिक नींव छात्र आंदोलनों और युवाओं के संघर्ष से निकली है, इसलिए छात्र संगठन को मजबूत करना पार्टी की प्राथमिकता है. नेताओं का कहना था कि छात्र ही भविष्य की राजनीति और समाज की दिशा तय करते हैं, इसलिए युवाओं को संगठित करना जरूरी है.
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कॉलेज और विश्वविद्यालयों में बनेगी कमेटियां
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि चयनित छात्र सदस्य हजारीबाग जिले के विभिन्न कॉलेजों, विश्वविद्यालय परिसरों और अनुमंडलों में नई कमेटियों का गठन करेंगे. संगठन ने साफ किया कि जो कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर सक्रियता दिखाएंगे और छात्र हितों के मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे, उन्हें आगे जिला और प्रदेश स्तर पर संगठन में बड़ी जिम्मेदारियां दी जाएंगी. इसके साथ ही संगठनात्मक पारदर्शिता बनाए रखने के लिए भविष्य में सभी महत्वपूर्ण पदों पर लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव कराने की बात भी कही गई.
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कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को मिली जिम्मेदारी
बैठक के दौरान संगठन विस्तार को लेकर कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई. इनमें बिहारी महतो, उदय मेंटर, नकुल महतो, ई. मुकेश कुमार महतो, लीलाधन प्रजापति और महेंद्र प्रसाद मंडल समेत कई नाम शामिल रहे. इसके अलावा बड़कागांव, रामगढ़, चतरा, ईचाक और बरही क्षेत्र में भी संगठन को मजबूत करने के लिए कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई.
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छात्र मुद्दों पर संघर्ष से तय होगी पहचान
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हजारीबाग में छात्र राजनीति लंबे समय से निष्क्रियता और सीमित मुद्दों के आरोप झेलती रही है. ऐसे में जेकेसीएम की यह पहल युवाओं के बीच नई राजनीतिक सक्रियता पैदा कर सकती है. हालांकि किसी भी छात्र संगठन की असली पहचान उसके आंदोलनों और छात्र हितों के लिए किए गए संघर्ष से तय होती है. यदि संगठन छात्रवृत्ति में देरी, परीक्षा परिणाम, रोजगार, कॉलेजों की बदहाल व्यवस्था और विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही जैसे मुद्दों पर मजबूती से आवाज उठाता है, तभी छात्रों के बीच अपनी विश्वसनीय पहचान बना पाएगा. वरना यह पहल भी केवल राजनीतिक विस्तार का औपचारिक प्रयास बनकर रह सकती है.
