रांची: झारखंड हाई कोर्ट ने पेंशन के एक मामले में प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने आदेश का पालन न करने पर पलामू के जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) के वेतन (Salary) पर रोक लगा दी है. यह मामला संत लाल सिंह से जुड़ा है, जो पिछले 13 सालों से अपने पेंशन और रिटायरमेंट के पैसों के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे. विभाग की ओर से सर्विस बुक गुम होने का बहाना बनाकर उन्हें उनके हक से वंचित रखा गया था.
विभाग पर 50,000 का जुर्माना
इससे पहले हुई सुनवाई में हाई कोर्ट ने साफ आदेश दिया था, कि पिटीशनर को उनके रिटायरमेंट के सारे पैसे 6% ब्याज के साथ दिए जाएं. कोर्ट ने अपने आदेश में विभाग पर 50,000 का जुर्माना भी लगाया गया था. कोर्ट ने साफ कहा था कि सर्विस बुक गायब होना कोई बहाना नहीं है और इसके लिए जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई होनी चाहिए. कोर्ट के आदेश के बावजूद जब अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, तो संत लाल सिंह ने अवमानना का केस दर्ज किया. हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस आनंद सेन की बेंच ने नाराजगी जताते हुए पलामू DTO की सैलरी रोकने का निर्देश दे दिया है. अदालत में पिटीशनर का पक्ष वकील देवेश अजमानी ने रखा.
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