रांचीः झारखंड के कई क्षेत्र भूकंपीय क्षेत्र में तब्दील हो रहे हैं. वैज्ञानिक शोध में यह बात सामने आई है कि साहेबगंज और दामोदर घाटी का क्षेत्र तुलनात्मक रूप से अधिक संवेदी है. शोध में कहा गया है कि दामोदर घाटी एक तरह की भ्रंश घाटी है. भूकंपीय तरंगों के कारण भ्रंशों में अधिक सक्रियता होती है. इसके पीछे तर्क यह भी है कि नर्मदा घाटी के समीप स्थित जबलपुर में इस तरह की घटना घट चुकी है.

चार जिले अधिक संवेदनशील
झारखंड के चार जिले भूकंप के मामले में अधिक संवेदनशील हैं. पलामू, हजारीबाग, साहिबगंज, गोड्डा के अलावा दामोदर नदी घाटी के आस-पास के क्षेत्र को भूकंप के लिए संवेदनशील स्थल माना गया है. इसका वैज्ञानिकों के शोध में खुलासा हुआ है.
क्या बताई गई है वजह
इसकी वजह यह बताई जा रही है कि इन जगहों पर पाई जाने वाली कैल्साइट की चट्टानें जल्द गर्म हो जाती हैं. इसमें स्ट्रेन एनर्जी प्रोडक्शन की क्षमता काफी अधिक होती है. इस वजह से ये क्षेत्र प्रोन टू अपग्रेड जोन के रूप में परिवर्तित हो गया है.
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क्यों आता है भूकंप
धरती के नीचे भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के आपस में टकराने के कारण भूकंप की स्थिति बनती है. प्लेट टकराने से उत्पन्न दबाव चट्टानों की इलास्टिक (लचीलापन) सीमा को पार कर जाती है. इस वजह से चट्टानें टूट जाती हैं. इससे निकली ऊर्जा चट्टानों में कंपन उत्पन्न करती है.
रांची है सेफ जोन में
रांची सेफ जोन में शामिल है। यहां कैल्साइट की चट्टानें कम पाई जाती हैं. क्रिस्टल क्वार्ट्ज चट्टानें अधिक हैं, जो अधिकांश समय ठंडी रहती हैं. भू-वैज्ञानिकों का मानना है कि छोटानागपुर का पठार ग्रेनाइट चट्टानों का बैथोलिथ है. इसकी कठोरता के कारण कम तीव्रता वाली भूकंपीय तरंग विरूपित नहीं हो पाती हैं. इस कारण भूकंपीय तरंगों का प्रभाव कम होता है.
