Lifestyle Desk: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में एक अजीब विडंबना है. हम बेहतर हेल्थ के पीछे भाग रहे हैं, नींद ट्रैक कर रहे हैं, स्टेप्स गिन रहे हैं, डाइट सुधार रहे हैं, लेकिन जिस चीज को हम हर पल करते हैं, उसी पर ध्यान नहीं देते और वो है सांस लेना. सांस लेना ऑटोमैटिक है और शायद इसी वजह से हम इसे नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन योग के अनुसार, आप कैसे सांस लेते हैं, यह आपके शरीर और मन दोनों को गहराई से प्रभावित करता है.
सिर्फ सांस नहीं, सही तरीके से सांस लेना
योग विशेषज्ञ Himalayan Siddhaa Akshar, जो Akshar Yoga Kendraa के संस्थापक हैं, उनका कहना है, कि “प्राणायाम सिर्फ ब्रीदिंग एक्सरसाइज नहीं है. यह शरीर, मन और ऊर्जा को संतुलित करने का एक तरीका है.”
‘प्राणायाम’ शब्द दो भागों से बना है:
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प्राण: जीवन शक्ति
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आयाम: विस्तार या नियंत्रण
सीधा सा मतलब है सांस को धीमा करना, उस पर ध्यान देना और उसके जरिए पूरे शरीर को संतुलित करना.
शरीर में क्या बदलाव होता है
अक्सर हम बिना ध्यान दिए हल्की (shallow) सांस लेते हैं, खासकर जब हम तनाव में होते हैं. इससे शरीर हमेशा हल्के तनाव की स्थिति में रहता है. लेकिन जब आप सांस को धीरे-धीरे और गहराई से लेते हैं:
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ऑक्सीजन का फ्लो बेहतर होता है
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फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है
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नर्वस सिस्टम शांत होता है
यह बदलाव बहुत सूक्ष्म होता है, लेकिन महसूस किया जा सकता है. जैसे अचानक कंधों का तनाव कम हो जाना.
तनाव कम करने में क्यों असरदार है
तनाव हमेशा जोर से नहीं आता. कभी-कभी यह बेचैनी, चिड़चिड़ापन या अजीब सा “off” महसूस होने के रूप में दिखता है.
ऐसे में सांस लेने का तरीका बहुत मायने रखता है. तेज और उथली सांस तनाव को बढ़ाती है, जबकि प्राणायाम इसे उलट देता है. इससे-
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दिल की धड़कन स्थिर होती है
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मन शांत होता है
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प्रतिक्रियाएं कम आवेगपूर्ण होती हैं
फोकस और मानसिक स्पष्टता पर असर
जब सांस स्थिर होती है, तो विचार भी धीरे-धीरे शांत होने लगते हैं.
नियमित अभ्यास से:
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एकाग्रता बढ़ती है
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याददाश्त बेहतर होती है
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मानसिक स्पष्टता आती है
सिर्फ कुछ मिनटों की गहरी सांस भी ऐसा महसूस करवा सकती है जैसे आपने दिमाग को “रीसेट” कर दिया हो, बिना कॉफी के.
लोग फिर से क्यों अपना रहे हैं प्राणायाम
प्राणायाम की सबसे बड़ी खासियत है इसकी सादगी.
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कोई उपकरण नहीं चाहिए
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कोई तय समय नहीं
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कहीं भी किया जा सकता है
यह आपको कुछ नया जोड़ने के लिए नहीं कहता, बल्कि जो पहले से मौजूद है, उसे महसूस करने के लिए कहता है.
तकनीक से ज्यादा जागरूकता
समय के साथ, प्राणायाम सिर्फ एक अभ्यास नहीं रह जाता, बल्कि एक जागरूकता (awareness) बन जाता है. यह जागरूकता आपके जीवन के बाकी हिस्सों में भी दिखने लगती है:
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आप तनाव पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं
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आप क्या और कैसे खाते हैं
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आप खुद को कितना समय देते हैं
हर हेल्थ हैबिट जटिल नहीं होती. कभी-कभी, बदलाव की शुरुआत सिर्फ अपनी सांस पर ध्यान देने से होती है.
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