Ranchi: रांची सिविल कोर्ट ने सात साल पुराने एक चर्चित हत्याकांड में अपना फैसला सुनाते हुए दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई है. सिविल कोर्ट के न्यायाधीश देबाशीष महापात्रा की अदालत ने सौतेले पिता की जघन्य हत्या के मामले में पॉलुस मुंडा उर्फ संगोवार को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. यह मामला 1 नवंबर 2016 का है. प्राथमिकी के मुताबिक मृतक पॉलुस मुंडा का अपने सौतेले पिता उम्बलेन भुइयां के साथ किसी बात को लेकर विवाद हुआ था. देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि पॉलुस ने अपना आपा खो दिया और घर में रखे लोहे की रॉड से उम्बलेन के सिर पर जोरदार प्रहार कर दिया. इस हमले में उम्बलेन भुइयां की मौके पर ही मौत हो गई थी. इस पूरे मामले में सबसे अहम मोड़ तब आया जब मृतक की नाबालिग बेटी ने साहस दिखाते हुए अदालत में बयान दिया. घटना के समय वह वहीं मौजूद थी और उसने अपनी आंखों से अपने पिता की हत्या होते देखी थी.
अभियोजन पक्ष ने कुल नौ गवाह पेश किए, तीन अपने बयान से पलटे
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल नौ गवाह पेश किए. लेकिन नौ में से तीन गवाह अपने बयान से पलट गए. इसके बावजूद चश्मदीद गवाह (मृतक की बेटी) अपने बयान पर अडिग रही. जिसके बाद अदालत ने पॉलुस मुंडा को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही कोर्ट ने दोषी के ऊपर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जुर्माना नहीं भरने पर दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.
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