• जनता का पैसा और सरकारी जमीन लूटने वाले साहबों की अब छिनेगी ‘साहबी’
Ranchi: झारखंड सरकार ने प्रशासनिक गलियारे में फैली दीमक को साफ करने के लिए बड़ा अभियान छेड़ दिया है. पिछले चार महीनों के भीतर राज्य के 11 कद्दावर राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया गया है. इन अधिकारियों पर जनता की सेवा के बजाय पद का दुरुपयोग, सरकारी खजाने में सेंधमारी और भू-माफियाओं के साथ साठगांठ जैसे गंभीर आरोप हैं. मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद अब इन सभी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की आंच तेज हो गई है.
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कुर्सी की आड़ में खेल: किन अफसरों पर क्या हैं आरोप?
जमीन का सौदागर बना अंचल अधिकारी: कोडरमा के तत्कालीन अंचल अधिकारी अशोक राम पर बिना किसी फिजिकल वेरिफिकेशन के 24 एकड़ गैर-मजरूआ खास जमीन की ऑनलाइन रसीद काटने का काला खेल खेलने का आरोप है. वहीं, चान्हो के तत्कालीन सीओ मो. जफर हसनात पर 35 एकड़ जमीन के कपटपूर्ण दस्तावेजों पर चुप्पी साधने और स्पष्टीकरण न देने का आरोप है.
गरीबों के आवास और मनरेगा में डाका: मांडूके तत्कालीन बीडीओ जागो महतो ने इंदिरा आवास योजना में अयोग्य लाभुकों को उपकृत किया, तो अड़की की तत्कालीन बीडीओ मेरी मड़की ने मिट्टी मोरम पथ निर्माण में वित्तीय अनियमितता बरती.
वेंडर को लाभ, सरकार को घाटा: कामडारा की तत्कालीन बीडीओ अमृता प्रियंका एक्का पर वेंडर को सीधे भुगतान करने और मुखिया के डिजिटल सिग्नेचर का अवैध उपयोग करने जैसा संगीन आरोप है. वहीं, बरही के तत्कालीन सीओ संजय कुमार सिंह की एक गलत रिपोर्ट से सरकार को 75.82 लाख के राजस्व की चपत लगी है.
नगर निगम में करोड़ों का वारा-न्यारा: धनबाद के तत्कालीन उप नगर आयुक्त अनिल कुमार यादव पर मेसर्स व्योम टेक्नोलॉजी को बिना गुणवत्ता जांच के जल्दबाजी में भुगतान करने का आरोप है, जिससे 2.65 करोड़ का सरकारी नुकसान हुआ.
जेसीबी का प्राइवेट इस्तेमाल: महागामा के तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी राजीव कुमार मिश्रा ने सरकारी जेसीबी को बिना अनुमति ग्रामीण क्षेत्रों में चलवाया और उसकी कमाई सरकारी खाते में जमा करने के बजाय डकार गए.
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लापरवाही और मनमानी की भी हदें पार
तमाड़ के तत्कालीन बीडीओ सुबोध कुमार और चुरचू के खाखा सुशील कुमार जैसे अधिकारियों पर अनुशासनहीनता, बैठकों से गायब रहने और विकास योजनाओं आदर्श ग्राम, पीडीएस में घोर लापरवाही बरतने के आरोप में शिकंजा कसा गया है. टंडवा के तत्कालीन सीओ लियाकत अली पर भी सरकारी जमीन की गलत जमाबंदी करने के 5 गंभीर आरोप तय किए गए हैं.
