मजदूरों के दमन के खिलाफ रांची की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब, श्रमिक संगठनों ने फूंका आर-पार की जंग का बिगुल

Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची शनिवार को मजदूर एकता जिंदाबाद और श्रम विरोधी नीतियां वापस लो के नारों से गूंज उठी. संयुक्त...

Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची शनिवार को मजदूर एकता जिंदाबाद और श्रम विरोधी नीतियां वापस लो के नारों से गूंज उठी. संयुक्त ट्रेड यूनियन मंच के बैनर तले आयोजित इस विशाल एकजुटता रैली ने साफ कर दिया है कि अब श्रमिक अपने अधिकारों के हनन पर खामोश नहीं बैठेंगे. जयपाल सिंह स्टेडियम से शुरू होकर अल्बर्ट एक्का चौक तक निकली. इस रैली में लाल झंडों का समंदर उमड़ पड़ा, जिसमें हजारों की संख्या में मजदूरों ने अपनी हुंकार भरी.

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चार लेबर कोड पर सरकार को अल्टीमेटम

सभा की अध्यक्षता करते हुए एटक के अजय सिंह और अन्य दिग्गज श्रमिक नेताओं ने केंद्र व राज्य सरकार को सीधी चेतावनी दी. नेताओं का कहना है कि सरकार द्वारा लाए जा रहे चार लेबर कोड मजदूरों को गुलामी की ओर धकेलने की साजिश है. इन कोड्स के जरिए छंटनी को कानूनी मान्यता देने का विरोध किया गया. ड्यूटी के समय को 8 से बढ़ाकर 12 घंटे करने को अमानवीय बताया गया. मजदूर संगठनों को कमजोर करने और ठेका प्रथा को बढ़ावा देने वाली नीतियों की आलोचना की गई.

देशव्यापी आक्रोश और मौजूदा दुर्दशा

रैली को संबोधित करते हुए भाकपा के महेंद्र पाठक और अन्य नेताओं ने बताया कि यह गुस्सा सिर्फ रांची तक सीमित नहीं है. गुड़गांव, नोएडा और फरीदाबाद जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में लाखों मजदूर स्वतःस्फूर्त आंदोलन कर रहे हैं. वक्ताओं ने अफसोस जताया कि आज के महंगाई के दौर में भी मजदूरों को मात्र 10-11 हजार रुपये की मजदूरी पर 13 घंटे खटना पड़ रहा है, जो कि उनके साथ भद्दा मजाक है.

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कौने-कौने से जुटे श्रमिक

इस प्रदर्शन में रांची के अलावा बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर और हजारीबाग से आए ठेका कर्मचारी, स्कीम वर्कर और असंगठित क्षेत्र के लोग शामिल हुए. नेताओं ने ऐलान किया कि यदि दमनकारी नीतियां वापस नहीं ली गईं, तो यह आंदोलन गांव-गांव और कारखाने-कारखाने तक पहुंचेगा.सभा में पंकज कुमार, सुनीता खलको, शुभेंदु सेन, अनिर्माण बॉस, लीलाधर सिंह, प्रतीक मिश्रा और सुखनाथ लोहारा सहित सैकड़ों सक्रिय कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे.

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