RANCHI: झारखंड में नई कोयला वितरण नीति के नाम पर कथित बंदरबांट और काले कारोबार पर लगाम लगाने के लिए सरकार सख्त हो गई है. अब एमएसएमई इकाइयों को आवंटित कोयले का पूरा हिसाब देना होगा. सरकार ने साफ कर दिया है कि आवंटन और उपयोग में जरा भी गड़बड़ी मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
उपयोगिता जांच के घेरे में 14 इकाइयां
राज्य सरकार के निर्देशानुसार जनवरी 2026 से मार्च 2026 के बीच 14 प्रमुख MSME इकाइयों को आवंटित 22,146 मीट्रिक टन कोयले की उपयोगिता की गहन जांच की जाएगी. इसके लिए सभी संबंधित इकाइयों का विवरण जिला प्रशासन और विभागों को भेजकर रिपोर्ट मांगी गई है.
आंकड़ों में गड़बड़ी की आशंका
सरकार की सूची में दुमका, धनबाद, जामताड़ा, रांची और देवघर की इकाइयां शामिल हैं. आवंटित कोयले की मात्रा और उद्योगों की वास्तविक उत्पादन क्षमता के बीच अंतर की जांच की जा रही है. इस फैसले के बाद औद्योगिक क्षेत्रों में हलचल तेज हो गई है. जांच की जिम्मेदारी उपायुक्तों और जिला खनन पदाधिकारियों को सौंपी गई है.
क्यों सख्त हुई सरकार
जानकारी के अनुसार, कुछ इकाइयां सब्सिडी दर पर कोयला लेकर कागजों में उत्पादन दिखाती हैं और असल में उस कोयले को बाजार में ऊंचे दाम पर बेच देती हैं. इसे रोकने के लिए सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है. अब उद्योगों को बिजली बिल, जीएसटी रिटर्न और श्रमिक रिकॉर्ड के जरिए यह साबित करना होगा कि कोयले का उपयोग उत्पादन में ही किया गया है.
इन इकाइयों पर है नजर (आवंटन मीट्रिक टन में)
• मां तारा कोल साइजिंग, दुमका – 3564 मीट्रिक टन
• मां भगवती इंटरप्राइजेस, धनबाद – 2483 मीट्रिक टन
• एमके इंटरप्राइजेस, देवघर – 2051 मीट्रिक टन
• मां छिन्नमस्तिका सेमरिक, धनबाद – 1710 मीट्रिक टन
• मां तारा इंडस्ट्रीज, धनबाद – 1700 मीट्रिक टन
• मां दुर्गा इंटरप्राइजेस, धनबाद – 1484 मीट्रिक टन
• बेरी रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड, धनबाद – 1475 मीट्रिक टन
• अमन कोक इंडस्ट्रीज, धनबाद – 1344 मीट्रिक टन
• प्रकाश इंडस्ट्रीज, धनबाद – 1325 मीट्रिक टन
• एनर्जी कोल इंटरप्राइजेस, जामताड़ा – 1319 मीट्रिक टन
• जय मां घाघरबुद्धि इंटरप्राइजेस, जामताड़ा – 1110 मीट्रिक टन
• जय मां चंचला इंटरप्राइजेस, जामताड़ा – 1093 मीट्रिक टन
• मिहिजाम वनस्पति, जामताड़ा – 800 मीट्रिक टन
• श्री महावीर रिफ्रैक्ट्रीज वर्क्स, रांची – 728 मीट्रिक टन
सरकार के इस कदम से साफ संकेत मिल रहे हैं कि अब कोयले के आवंटन और उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी की जाएगी.
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