DHANBAD: कोलकाता के दमदम एयरपोर्ट से पकड़ा गया अपराधी प्रिंस खान सबसे करीबी और भरोसेमंद गुर्गे मेजर उर्फ सैफी ने कई राज खोले है. गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के दौरान उसने प्रिंस खान के आतंक वाले साम्राज्य और उसके आर्थिक ढांचे को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं.
गैंग का चीफ फाइनेंशियल मैनेजर था सैफी:
पूछताछ में यह बात सामने आई है कि सैफी केवल एक अपराधी नहीं, बल्कि प्रिंस खान के गिरोह का बैकबोन था. वह गिरोह के चीफ फाइनेंशियल मैनेजर के रूप में काम करता था. व्यापारियों और ठेकेदारों से वसूली गई रंगदारी का पूरा हिसाब-किताब उसी के पास रहता था. किस गुर्गे को कितनी सैलरी देनी है, शूटरों को सुपारी की कितनी रकम पहुंचानी है और गिरोह के खर्चों का प्रबंधन कैसे करना है. यह सब सैफी ही तय करता था.
दुबई तक फंड पहुंचाने का सीक्रेट रूट:
सैफी के कबूलनामे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा फंड ट्रांसफर से जुड़ा है. उसने पुलिस को उस सीक्रेट रूट और माध्यम की जानकारी दी है, जिसके जरिए रंगदारी का मोटा हिस्सा दुबई में बैठे प्रिंस खान तक पहुंचाया जाता था. पुलिस अब उन सफेदपोश मददगारों और हवाला कारोबारियों की तलाश में जुट गई है, जो इस मनी ट्रेल में सैफी की मदद करते थे.
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हाइब्रिड मॉडल: डिजिटल धमकी और स्थानीय नेटवर्क:
मेजर उर्फ सैफी ने दहशत फैलाने के लिए एक हाइब्रिड मॉडल।तैयार किया था. वह व्यवसायियों को सीधे वर्चुअल नंबरों से कॉल करता था और खुद को मेजर बताकर प्रिंस खान का खौफ पैदा करता था. रंगदारी न देने पर वारदात को अंजाम दिया जाता था और उसके तुरंत बाद स्थानीय गुर्गों के जरिए पर्चा वायरल करवाया जाता था ताकि दहशत बनी रहे. सैफी ही वह व्यक्ति था जो रसूखदार व्यवसायियों के मोबाइल नंबर जुटाता था और स्थानीय नेटवर्क को सक्रिय करता था.
हथियारों का लाइजनिंग और शूटर मैनेजमेंट:
सैफी ने स्वीकार किया कि वह गिरोह के लिए हथियारों की व्यवस्था भी करता था. वारदात के लिए हथियार कहां से आएंगे, कौन सप्लाई करेगा और किस शूटर को कौन सा हथियार दिया जाएगा, इसकी पूरी प्लानिंग सैफी ही करता था. वह हर गुर्गे के ‘परफॉर्मेंस’ के आधार पर उनका हिस्सा तय करता था और सारी जानकारी एक डायरी में कोड वर्ड में लिखता था.
