धर्म डेस्क: सनातन धर्म में ज्येष्ठ मास को तप, साधना और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना गया है. हिंदू पंचांग के अनुसार यह वर्ष का तीसरा महीना होता है और इसका संबंध मंगल ग्रह से जोड़ा जाता है.
ज्येष्ठ पूर्णिमा के समय ‘ज्येष्ठा नक्षत्र’ के योग के कारण ही इस माह को ज्येष्ठ नाम दिया गया है. खास बात यह है कि इस वर्ष ज्येष्ठ मास में अधिक मास का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है, जिसे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए बेहद शुभ अवसर माना जाता है.
ज्येष्ठ मास में अपनाएं ये शुभ उपाय
- इस माह में गर्मी अपने चरम पर रहती है, इसलिए धार्मिक मान्यताओं में ऐसे कार्यों को महत्व दिया गया है जो शरीर और मन दोनों को शांति दें:
- ज्येष्ठ के दौरान प्यासे लोगों को पानी पिलाना बहुत पुण्यकारी माना जाता है. राहगीरों के लिए प्याऊ की व्यवस्था करना और पशु-पक्षियों के लिए पानी रखना सकारात्मक फल देता है.
- भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए तिल, अन्न और सत्तू का दान करना शुभ माना गया है.
- मान्यता है कि इस महीने में एक समय सात्विक भोजन करने से स्वास्थ्य बेहतर रहता है और जीवन में समृद्धि आती है.
- रोज सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना और जल से संबंधित देवता की पूजा करना भी लाभकारी माना जाता है.
बड़ा मंगल का खास महत्व
ज्येष्ठ मास के हर मंगलवार को ‘बड़ा मंगल’ या ‘बुढ़वा मंगल’ के नाम से जाना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इसी अवधि में हनुमान जी का श्रीराम से साक्षात्कार हुआ था, इसलिए ये दिन विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं.
इस दौरान मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा-अर्चना करना और उन्हें बूंदी के लड्डू अर्पित करना लाभकारी माना जाता है. ऐसा करने से जीवन की कठिनाइयों में राहत मिलने की मान्यता है.
इसी महीने में निर्जला एकादशी, गंगा दशहरा और वट सावित्री जैसे महत्वपूर्ण व्रत और पर्व भी पड़ते हैं, जो इस माह की धार्मिक महत्ता को और बढ़ाते हैं.
ज्येष्ठ मास में किन बातों से रखें परहेज?
इस पवित्र महीने में कुछ आदतों से दूर रहने की सलाह दी जाती है:
- दिन में अधिक सोना – मान्यता है कि दोपहर में ज्यादा सोना सेहत और दिनचर्या दोनों पर असर डाल सकता है. (हालांकि बीमार या जरूरतमंद व्यक्ति के लिए छूट मानी गई है)
- बैंगन का सेवन – इस माह में बैंगन खाने से परहेज करने की बात कही जाती है. आयुर्वेद के अनुसार यह शरीर में गर्मी बढ़ा सकता है.
- पानी की अनदेखी या बर्बादी -ज्येष्ठ में जल का विशेष महत्व बताया गया है, इसलिए पानी का सम्मान करना जरूरी माना गया है.
- तामसिक और भारी भोजन – ज्यादा तला-भुना या मसालेदार भोजन इस मौसम में पाचन पर असर डाल सकता है, इसलिए हल्का और संतुलित आहार बेहतर माना जाता है.
इन बातों का ध्यान रखकर इस महीने को और भी शांत व संतुलित तरीके से बिताया जा सकता है.
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DISCLAIMER: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है. इसमें बताए गए उपाय, लाभ या कथनों की पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं की गई है. यहां दी गई जानकारी विभिन्न स्रोतों, ज्योतिषीय मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संकलित है. पाठकों से अनुरोध है कि इसे अंतिम सत्य न मानें और किसी, भी निर्णय से पहले अपने विवेक का प्रयोग करें.
