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आरोपी ही खोल रहे पोल, खाता न बही विनय सिंह को जमीन दिलाने के लिए विनय चौबे ने किया सब सही

विनीत आभा उपाध्याय Ranchi : जेल में बंद निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे पर हजारीबाग में डीसी रहते हुए जिस ज़मीन की...

विनीत आभा उपाध्याय

Ranchi : जेल में बंद निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे पर हजारीबाग में डीसी रहते हुए जिस ज़मीन की नियम विरुद्ध तरीक़े से ख़रीद-बिक्री और म्युटेशन कराने का आरोप लगा है. उसी केस के एक आरोपी और तत्कालीन अंचल निरीक्षक राजेंद्र प्रसाद सिंह ने खुद स्वीकार किया है, कि उन पर विनय चौबे का भारी दबाव था. यह दबाव किसी जनहित के काम के लिए नहीं बल्कि बिनय कुमार सिंह और स्निग्धा सिंह के पक्ष में नियम विरुद्ध म्यूटेशन कराने के लिए था. सबसे हैरानी की बात यह है कि जिस जमीन का म्यूटेशन किया गया उसके असली हकदार कोई और थे लेकिन रसूखदार साहब के आदेश पर कागजों में हेराफेरी कर दी गई. राजेंद्र प्रसाद सिंह ने यह पूरी बात हाईकोर्ट में काउंटर एफिडेविट देकर बताई है. इस खबर की सबसे कड़वी सच्चाई यह है कि जिस भगवान प्रसाद गुप्ता को विक्रेता बताकर जमीन बेची गई उसका उस जमीन पर कोई मालिकाना हक था ही नहीं. सरकारी रिकॉर्ड (रजिस्टर II) चिल्ला-चिल्ला कर कह रहा है, कि जमीन प्रदीप कुमार जैन और राजेश कुमार जैन के नाम पर दर्ज थी. लेकिन नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बिना टाइटल जांचे सिर्फ ऊपर के दबाव में आकर म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी कर दी गई. शायद यही वजह है कि इस पूरे मामले की जांच कर रही एजेंसी एसीबी को इस बात का पक्का अंदेशा है, कि अगर केस के इस स्टेज पर विनय चौबे को बेल मिली और उन्हें जमानत पर रिहा किया गया तो न्याय की उम्मीद ही खत्म हो जाएगी क्योंकि आरोपी का कद इतना बड़ा है, कि वह अपने उन दो अधीनस्थों राजेंद्र प्रसाद सिंह और राम प्रकाश चौधरी को आसानी से प्रभावित कर सकता है जिन्होंने उसके खिलाफ मुंह खोला है.

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