Trump ने रिजेक्ट किया ईरान का प्रस्ताव, कहा पागलों के हाथ में नहीं दे सकते एटम बम

Newswave Desk: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के परमाणु प्रोग्राम ऑर वहां के नेतृत्व पर एक बार फिर हमला करते हुए...

साभार गूगल

Newswave Desk: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के परमाणु प्रोग्राम ऑर वहां के नेतृत्व पर एक बार फिर हमला करते हुए कहा कि किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे क्योंकि यह पूरी दुनिया के सुरक्षा के लिए खतरा है.ट्रम्प ने कड़े लहजों में कहा, ईरान को परमाणु हथियार नहीं दिए जा सकते हैं क्योंकि इसका सबसे पहले इस्तेमाल इजरायल पर करेंगे फिर मिडिल ईस्ट उसके बाद यूरोप पर, अगला नंबर हमारा होगा.ऐसे पागलों के हाथ में परमाणु हथियार नहीं दे सकते हैं’

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने पाकिस्तान के जरिए आए मध्यस्थतता प्रस्ताव पर नाराजगी जाहिर करते हुए ट्रम्प ने कहा कि ईरान ऐसी शर्ते रख रहा है, जिसे अमेरिका कभी स्वीकार नहीं कर सकता है. व्हाइट हाउस से फ्लोरिडा रवाना होते हुए ट्रम्प ने कहा, ‘ वे समझौता तो करना चाहते हैं, लेकिन मैं इससे संतुष्ट नहीं हूँ’.

परमाणु बम पर कोई समझौता नहीं

डोनाल्ड ट्रम्प ने दोहराया कि ईरान को किसी कीमत पर परमाणु बम बनाने नहीं दिया जाएगा. ट्रम्प ने यह भी दावा किया है कि अमेरिकी सैन्य कारवाई, खासकर B-2 बोमबर्स के इस्तेमाल से ईरान को काफी नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने ने यह भी कहा कि ईरान के पास न तो कोई नौ सेना है, न वायु सेना है ऑर न ही रडार सिस्टम. जब ट्रम्प से यह सवाल किया गया कि वे ईरान को पूरी तरह से खात्मा के लिए भीषण हमला करना चाहते हैं, तो उन्होंने ने कहा कि मानवता के आधार पर मैं ऐसा नहीं करना चाहूँगा लेकिन हम एक ऐसी डील चाहते हैं जो समस्या को जड़ से खत्म कर दे.ईरानी सरकार को ‘दुष्ट ‘ बताते हुए कहा कि वहां न कोई वास्तविक लीडर है बल्कि उन्होनें आरोप लगाया कि ईरान सरकार ने दो सप्ताह के भीतर 42,000 प्रदर्शनकारियों की हत्या कर दी.

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वैश्विक संकट के पीछे की वजह होरमुज

बीते 28 फरवरी से अमेरिका -इजराइएल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के साथ युद्ध  शुरू हुआ था. इस युद्ध में ईरान द्वारा स्टेट ऑफ होरमुज बंद कर दिया गया है जिसके कारण वैश्विक ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ रहा है. वैश्विक तेल बाजार में हाहाकार मचा हुआ है. 8 अप्रैल को इस जंग का सीजफायर तो हुआ लेकिन तनाव अब भी बना हुआ है. कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई है. इसकी वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा मंडरा रहा है.

 

 

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