Ranchi : राजधानी रांची के प्रमुख शिक्षण संस्थानों के खिलाफ छात्रों का आक्रोश भड़क गया है. एक ओर सेंट पॉल्स कॉलेज में डिग्री के नाम पर घमासान छिड़ा है, तो दूसरी ओर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू ) में फीस वृद्धि को लेकर आर-पार की जंग जारी है. दोनों ही मामलों में छात्र संगठनों (एआइएसए और आदिवासी छात्र संघ) ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
सेंट पॉल्स कॉलेज: बीसीए के पैसे और बीएससी सीए की डिग्री?
सेंट पॉल्स कॉलेज में छात्रों ने कॉलेज प्रशासन पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है. छात्रों का दावा है कि उन्होंने बीसीए (बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन) में नामांकन लिया, लेकिन उन्हें बीएससी कंप्यूटर एप्लीकेशन का पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है. आइसा के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रशासन फीस कम करने को तैयार नहीं है और विरोध करने पर करियर खराब करने की धमकी दी जा रही है.
क्या कहता है प्रबंधन
प्रिंसिपल डॉ. अनुज कुमार ने स्पष्ट किया कि कॉलेज के पास रांची विश्वविद्यालय से वैध एफिलिएशन है. उन्होंने मार्कशीट में त्रुटि के लिए विश्वविद्यालय को जिम्मेदार ठहराया और छात्रों के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि तीसरे सेमेस्टर में विरोध करना संदेहास्पद है.
डीएसपीएमयू: 100 फीसदी फीस वृद्धि के खिलाफ अल्टीमेटम
उधर, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कॉमर्स विभाग में फीस को अचानक दोगुना (लगभग 100ः वृद्धि) किए जाने से छात्र आक्रोशित हैं. 5000-7000 रुपये वाली फीस अब सीधे 10,000-14,000 रुपये तक पहुंच गई है. छात्रों ने केवल फीस ही नहीं, बल्कि परिसर में खराब वाटर फिल्टर और शिक्षकों की अनियमित कक्षाओं पर भी सवाल उठाए हैं. रजिस्ट्रार ने कुलपति के लौटने पर 6 मई को बैठक का आश्वासन दिया है. छात्र नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि समाधान नहीं हुआ, तो विश्वविद्यालय को अनिश्चितकालीन बंद कर जेएनयू की तर्ज पर उग्र आंदोलन किया जाएगा.
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