Hazaribagh : हजारीबाग स्थित लॉ यूनिवर्सिटी की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है. यूनिवर्सिटी में एलएलएम पाठ्यक्रम के लिए पिछले छह महीनों से नामांकन प्रक्रिया तक शुरू नहीं हो सकी है. जिससे छात्रों में भारी आक्रोश है. आरोप है कि नामांकन फॉर्म भरने के नाम पर छात्रों से 1500 रूपये ली गई. लेकिन इसके बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी.
छात्र नेता चंदन सिंह ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नामांकन प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की जा रही है. जिससे निजी विश्वविद्यालयों को अप्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है. उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यवस्था गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के रास्ते बंद कर रही है.
हाई कोर्ट के निर्देश पर खत्म हुआ था कुलपति कोटा
गौरतलब है कि पूर्व कुलपति मुकुल नारायण देव के कार्यकाल में लागू “कुलपति कोटा” के खिलाफ चंदन सिंह ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की थी. जिसके बाद इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया. इसके बाद राजभवन ने संस्थापक प्राचार्य और तत्कालीन निदेशक डॉ. कौशालेंद्र कुमार पर भी कार्रवाई की थी. इसके बावजूद यूनिवर्सिटी की स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ. समय-समय पर सुधार के लिए समितियां बनाई गईं, लेकिन उनकी रिपोर्ट कभी सार्वजनिक नहीं की गई.
नियमित प्राचार्य और पर्याप्त शिक्षकों का अभाव
वर्तमान में यूनिवर्सिटी बिना नियमित प्राचार्य और पर्याप्त शिक्षकों के संचालित हो रहा है. जिससे इसकी स्थिति केवल डिग्री वितरण केंद्र जैसी बनकर रह गई है.
छात्रों और अभिभावकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि अविलंब एल.एल.एम. नामांकन प्रक्रिया शुरू की जाए. स्थायी प्राचार्य और शिक्षकों की नियुक्ति की जाए तथा शैक्षणिक व्यवस्था को पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं.
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