Ranchi: झारखंड की राजधानी में बिजली व्यवस्था अब जनसुविधा नहीं, बल्कि जनता के सब्र का इम्तिहान बन गई है. झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम लिमिटेड हर साल मानसून से पहले रखरखाव और सुदृढ़ीकरण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करता है, लेकिन हकीकत यह है कि राजधानी की बिजली व्यवस्था आज भी राम भरोसे है. मंगलवार दोपहर तीन बजे आई आंधी और बारिश ने निगम के तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी. राजधानी के आधे से अधिक इलाकों की बत्ती गुल हो गई. खबर लिखे जाने तक कई इलाकों में अब तक पावर रिस्टोर नहीं हो पाया था.
घंटों की मशक्कत भी नाकाम
मंगलवार को महज कुछ मिनटों की आंधी-पानी ने रांची के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को घुटनों पर ला दिया. रातू रोड से लेकर विकास, अनगड़ा, नामकुम, लालपुर, सुखदेव नगर, हिंदपीढ़ी, किशोरगंज, हरमू, डिबडीह, कोकर, बरियातू, बूटी और डंगराटोली तक ऐसा कोई इलाका नहीं बचा, जहां बत्ती गुल न हुई हो. मामूली खराबी को ठीक करने और पावर रिस्टोर करने में विभाग को 4-4 घंटे लग रहे हैं. यह स्थिति तब है, जब विभाग दावा करता है कि उसके पास आधुनिक फॉल्ट डिटेक्शन सिस्टम और त्वरित प्रतिक्रिया टीमें मौजूद हैं.

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छह साल बाद भी ढाक के तीन पात
राजधानी को निर्बाध बिजली देने के लिए छह साल पहले 450 करोड़ रुपये की लागत से अंडरग्राउंड केबलिंग की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की गई थी. मकसद था आंधी और बारिश में तारों के टूटने और शॉर्ट सर्किट की समस्या को जड़ से खत्म करना. लेकिन आधा दशक बीत जाने के बाद भी यह योजना धरातल पर नहीं उतर पाई है.
जर्जर तार और पुराने खंभे- आज भी राजधानी की बिजली व्यवस्था दशकों पुराने और जर्जर नंगे तारों पर टिकी हुई है.
केबलिंग का इंतजार- कई इलाकों में अब तक तारों की सामान्य केबलिंग भी नहीं की गई है, जिससे हल्की हवा चलते ही फॉल्ट होना तय है.
क्वालिटी का अभाव- बिजली की वोल्टेज और पावर क्वालिटी में सुधार के दावे भी पूरी तरह खोखले साबित हुए हैं.
