Ranchi: झारखंड सरकार के प्रशासनिक गलियारों में साल 2026 के शुरुआती साढ़े पांच महीने (1 जनवरी से 9 जून 2026) कार्य संस्कृति, पारिवारिक दायित्वों और व्यक्तिगत जरूरतों के अनूठे संतुलन के गवाह रहे हैं. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि के दौरान राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत राजपत्रित और अराजपत्रित अधिकारियों व कर्मचारियों ने बड़े पैमाने पर छुट्टियों का उपभोग किया है.
राजपत्रित और अराजपत्रित कर्मियों का छुट्टी गणित
जनवरी 2026 से लेकर 9 जून 2026 तक राज्य के विभिन्न विभागों में छुट्टियों के आवेदन और उनकी स्वीकृति की रफ्तार काफी तेज रही. इस अवधि में कुल मिलाकर 42,450 कर्मियों ने अलग-अलग प्रकार के अवकाश लिए. इसमें प्रशासनिक और निर्णय लेने वाले स्तर के 12,150 राजपत्रित अधिकारियों ने छुट्टियां लीं, जिनमें झारखंड प्रशासनिक सेवा, झारखंड पुलिस सेवा और चिकित्सा क्षेत्र के अधिकारी शामिल हैं. वहीं, जमीनी स्तर पर फाइलों को दौड़ाने वाले और जनता से सीधे जुड़े 30,300 अराजपत्रित कर्मियों ने इस दौरान अवकाश का लाभ उठाया.

उपार्जित अवकाश का सबसे ज्यादा उपयोग
सरकारी सेवा में अर्न्ड लीव या उपार्जित अवकाश को संचित ऊर्जा की तरह देखा जाता है. इस अवधि में कुल 18,600 कर्मियों को उपार्जित अवकाश (ईएल) स्वीकृत किया गया. इनमें से 5,400 राजपत्रित अधिकारियों ने लंबी योजना, पारिवारिक शादियों या स्वास्थ्य कारणों से इस अवकाश का उपयोग किया. दूसरी ओर, 13,200 अराजपत्रित कर्मियों ने अपने खाते में जमा छुट्टियों का उपयोग करते हुए काम से कुछ समय का ब्रेक लिया. सचिवालय से लेकर जिला मुख्यालयों तक उपार्जित अवकाश लेने की प्रवृत्ति मार्च से मई के बीच सबसे अधिक देखी गई, जो बच्चों की बोर्ड परीक्षाओं और गर्मियों की छुट्टियों का समय होता है.
मातृत्व अवकाश को मिला पूरा संबल
कामकाजी महिलाओं को मातृत्व के संवेदनशील समय में राहत देने के लिए इस अवधि में कुल 1,420 महिला कर्मियों को मातृत्व अवकाश की मंजूरी दी गई. इसमें विभिन्न विभागों, विशेषकर शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग की 480 राजपत्रित महिला अधिकारियों (डॉक्टर, प्रोफेसर और प्रशासनिक अधिकारी) ने यह विशेष अवकाश लिया. वहीं, 940 अराजपत्रित महिला कर्मियों (सचिवालय सहायक, नर्स और क्लर्क) को उनके मातृत्व के सफर में सरकार की ओर से 180 दिनों के इस सवैतनिक अवकाश का लाभ मिला.
पितृत्व अवकाश लेने वालों की संख्या भी बढ़ी
बदलते दौर में अब पिता भी शिशु की देखभाल में बराबर की जिम्मेदारी निभा रहे हैं और सरकार का नियम इसमें पूरी मदद करता है. साल 2026 के इन साढ़े पांच महीनों में कुल 890 पुरुष कर्मियों ने पितृत्व अवकाश का लाभ उठाया. अपने नवजात बच्चे और पत्नी की देखभाल के लिए 260 राजपत्रित पुरुष अधिकारियों ने 15 दिनों के इस विशेष अवकाश का उपयोग किया. वहीं, 630 अराजपत्रित पुरुष कर्मचारियों ने भी इस छुट्टी का लाभ उठाकर पिता बनने के शुरुआती दिनों में अपने पारिवारिक दायित्वों को पूरा किया.
गृह विभाग सबसे आगे
गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग छुट्टियों के मामले में सबसे शीर्ष पर रहा है. पुलिस महकमे और कारा प्रशासन से जुड़े कर्मियों ने इस अवधि में सबसे ज्यादा अवकाश लिया. इसका मुख्य कारण पुलिस बल में 24 घंटे की तनावपूर्ण ड्यूटी और पिछले वर्षों के अवकाश बैकलॉग को क्लियर करना रहा. गृह विभाग के कुल 11,500 कर्मियों ने इस अवधि में छोटी-बड़ी छुट्टियां लीं.
दूसरे स्थान पर स्वास्थ्य विभाग
दूसरे नंबर पर स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग रहा, जहां डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और नर्सों सहित कुल 9,800 कर्मियों ने अवकाश का उपभोग किया. तीसरे स्थान पर स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग का नंबर आता है. नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत और मई-जून की गर्मियों की छुट्टियों के दौरान शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कुल 8,200 कर्मियों ने मातृत्व, पितृत्व और उपार्जित अवकाश का लाभ लिया.
अन्य विभागों में भी बड़ी संख्या में अवकाश
इसके बाद राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग और ग्रामीण विकास विभाग का स्थान रहा, जहां क्रमशः 4,100 और 3,850 कर्मियों ने प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच अपने लिए अवकाश का समय निकाला. शेष 5,000 छुट्टियां जल संसाधन, कृषि, पथ निर्माण और अन्य छोटे-बड़े विभागों के खाते में दर्ज की गईं.
