Giridih: जिला मे गरीबों के हक के सरकारी राशन की ढुलाई में बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. गिरिडीह-जमुआ मुख्य मार्ग के पाचंबा में सरकारी चावल से लदा वाहन (संख्या 9442) बिना किसी सरकारी पहचान या “खाद्य निगम” के बोर्ड के सड़क पर दौड़ता मिला. मामला सामने आने के बाद सरकारी राशन परिवहन की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं.
उल्लेख नहीं था कि उसमें सरकारी राशन लदा है
मौके पर मौजूद लोगों ने जब चालक से पूछताछ की तो उसने बताया कि चावल सिरसिया सरकारी गोदाम से लोड किया गया है और पिंडाटांड़ के जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) डीलर के यहां पहुंचाया जा रहा है. लेकिन हैरानी की बात यह रही कि वाहन पर कहीं भी यह उल्लेख नहीं था कि उसमें सरकारी राशन लदा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की सरकारी खाद्यान्न योजना गरीबों के लिए संचालित होती है. ऐसे में यदि राशन ढोने वाले वाहन की कोई सरकारी पहचान ही नहीं होगी, तो आम नागरिक कैसे जानेंगे कि उसमें सरकारी अनाज है? इससे हेराफेरी, गड़बड़ी और कालाबाजारी की आशंकाएं भी बढ़ जाती हैं.

मामले की जांच
जानकारों का कहना है कि सरकारी राशन परिवहन के दौरान निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य है. यदि वाहन बिना सरकारी पहचान के चल रहा था, तो यह नियमों की अनदेखी और गंभीर लापरवाही का मामला हो सकता है. अब बड़ा सवाल यह है कि क्या विभागीय अधिकारियों ने ऐसे वाहन को अनुमति दी थी या फिर पूरे मामले में नियमों को ताक पर रख दिया गया? मामले पर जब गिरिडीह के एएमओ से संपर्क किया गया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि सरकारी राशन की ढुलाई कर रहे वाहन पर आवश्यक सरकारी बोर्ड या पहचान अंकित नहीं है, तो कार्रवाई का प्रावधान है. उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
कई गंभीर सवाल
अब सबकी नजरें खाद्य आपूर्ति विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं. यदि जांच में परिवहन नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होना तय माना जा रहा है. फिलहाल इस घटना ने सरकारी राशन व्यवस्था की पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी तंत्र पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.


