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झारखंड सरकार की कार्रवाई : सड़क निर्माण में गड़बड़ी करने वाले इंजीनियर ने कहा – बालू लदे हाईवा के चलने से टूटा रोड, अब पेंशन में होगी 15% की कटौती, जाने क्या है आरोप

Ranchi : झारखंड सरकार ने ग्रामीण विकास विभाग कार्य प्रमंडल, गोड्डा के तत्कालीन असिस्टेंट इंजीनियर (अब सेवानिवृत्त) रामाशीष राम के खिलाफ बड़ी...

ग्रामीण विकास विभाग कार्य प्रमण्डल
AI तस्वीर

Ranchi : झारखंड सरकार ने ग्रामीण विकास विभाग कार्य प्रमंडल, गोड्डा के तत्कालीन असिस्टेंट इंजीनियर (अब सेवानिवृत्त) रामाशीष राम के खिलाफ बड़ी दण्डात्मक कार्रवाई की है. सड़क निर्माण कार्य में प्राक्कलन व विशिष्टियों के अनुरूप कार्य न करने, वित्तीय अनियमितता बरतने और ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप प्रमाणित होने के बाद सरकार ने उनकी पेंशन से अगले 10 वर्षों के लिए 15 प्रतिशत राशि की कटौती करने का आदेश दिया है.

क्या है आरोप 

– रामाशीष राम के विरुद्ध ग्रामीण विकास विभाग के पत्रांक दिनांक सात नवंबर 2019 के माध्यम से दो मुख्य आरोप प्रतिवेदित किए गए थे.

पहला आरोप : दुमका कार्य अंचल के तकनीकी सलाहकार द्वारा गोड्डा प्रमंडल के अधीन राज्य संपोषित योजना के अंतर्गत छोटी लोहबंधा से दरघट्टी तक पथ निर्माण कार्य की जांच की गई थी. जांच प्रतिवेदन में प्राक्कलन और विशिष्टियों के उल्लंघन से जुड़ी गंभीर त्रुटियां पाई गईं.

– यहां कुल चौड़ाई 3.80 मीटर और मोटाई 350 एमएम पाई गई, जो निर्धारित विशिष्टियों से कम थी. इस बिटुमिनस भाग वाले क्रस्ट की कुल मोटाई 360 एमएम पाई गई, जो प्राक्कलन के प्रावधान से कम थी. सड़क की चौड़ाई सिर्फ 3.60 मीटर पाई गई. इसके साथ ही आरएचएस में सड़क क्रस्ट की कुल मोटाई 295 एमएम पाई गई, जो नियमों के प्रतिकूल थी. यहां सड़क की चौड़ाई 3.80 मीटर और मोटाई मात्र 250 एमएम पाई गई. जो प्रावधानों से कम थी. पुराने पी.सी.सी. के चौड़ीकरण भाग में जीएसबी सिर्फ 130 एमएम पाया गया, जबकि इसे 150 एमएम होना चाहिए था. पूरे बिटुमिनस मार्ग में ‘प्रीमिक्स कारपेट’ क्षतिग्रस्त और असंतोषप्रद पाया गया. इससे यह स्पष्ट हुआ कि सहायक अभियंता द्वारा मानकों की अनदेखी कर सरकारी राशि का दुरूपयोग किया गया और ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाया गया.

– दूसरा आरोप : रामाशीष राम द्वारा कार्य का समुचित पर्यवेक्षण नहीं किया गया. यह लापरवाही पीडब्ल्यूडी कोड की कंडिका-32 में निहित प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है.

सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन नियमावली के तहत बदली कार्रवाई

इस मामले में शुरुआत में संकल्प संख्या-674 (S) 25 फरवरी 2021 द्वारा विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी. इसके तुरंत बाद, 28 फरवरी 2021 को रामाशीष राम सेवानिवृत्त हो गए. सेवानिवृत्ति के कारण इस कार्रवाई को संकल्प संख्या-1354 (S) आठ अप्रैल 2021 के माध्यम से ‘पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी)’ के तहत परिवर्तित कर दिया गया. विभागीय जांच पदाधिकारी विनोद कुमार ने अपनी जांच रिपोर्ट 22 अक्टूबर 2021 को सौंपी. जिसमें उन्होंने दोनों आरोपों को पूरी तरह प्रमाणित पाया. इसके बाद अगस्त 2022 में द्वितीय कारण नोटिस जारी कर उनकी पेंशन से स्थायी रूप से 20 प्रतिशत राशि की कटौती का प्रस्ताव रखा गया था.

इंजिनियर का बचाव और मंतव्यों में विरोधाभास

– इंजीनियर ने नवंबर 2022 में जवाब देते हुए अपने बचाव में कई तर्क दिए. उन्होंने दावा किया कि बालू लदे भारी वाहनों (हाईवा) के परिचालन के कारण सड़क की ऊपरी सतह क्षतिग्रस्त हुई थी. जिसे बाद में ठेकेदार द्वारा दुरुस्त करा दिया गया था.

– उन्होंने ग्रामीण सड़क विशिष्टियों का हवाला देते हुए कहा कि निर्माण के 15 महीने बाद प्रीमिक्सिंग का क्षतिग्रस्त होना स्वीकार्य सीमा के अंतर्गत आता है. उनके पक्ष में ग्रामीण कार्य विभाग के उप सचिव ने भी मार्च 2025 में एक मंतव्य जारी किया था. उप सचिव की रिपोर्ट में कहा गया था कि तकनीकी सलाहकार द्वारा की गई जांच आंशिक थी और सड़क डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड के अंतर्गत थी, इसलिए आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं.

सरकार का अंतिम निर्णय – विरोधाभास खारिज, दंड तय :

पथ निर्माण विभाग ने पूरे मामले की गहन समीक्षा की. विभाग ने पाया कि प्रारंभिक जांच पदाधिकारी और उप सचिव के मंतव्य में गहरा विरोधाभास है. विभाग ने उप सचिव के नरमी बरतने वाले मंतव्य से असहमति जताई और विभागीय जांच पदाधिकारी की रिपोर्ट को सही माना, जिसमें आरोपों को प्रमाणित पाया गया था.

 

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