Giridih : जमुआ प्रखंड के बदडीहा-2 पंचायत में सरकारी गैर-मजरुआ भूमि पर कथित अवैध पत्थर खनन का मामला अब प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है. हैरानी की बात यह है कि अंचल प्रशासन की जांच में सरकारी जमीन पर अवैध खनन की पुष्टि होने के बावजूद अब तक न खनन पर रोक लगी है, न मशीनें जब्त की गई हैं और न ही किसी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई है. ऐसे में ग्रामीणों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर अवैध खनन करने वालों को किसका संरक्षण प्राप्त है.
लगातार ब्लास्टिंग की जाने से सार्वजनिक रास्ते क्षतिग्रस्त
बदडीहा-2 निवासी दिव्यांग देवनंदन राय की शिकायत पर अंचल अधिकारी, अंचल निरीक्षक एवं राजस्व कर्मचारी ने संयुक्त जांच की थी. जांच के बाद अंचल अधिकारी, जमुआ ने पत्रांक-549, दिनांक 16 मई 2026 के माध्यम से जिला प्रशासन एवं जिला खनन पदाधिकारी को भेजी रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख किया कि स्वीकृत लीज क्षेत्र से बाहर प्लॉट संख्या-59 की लगभग 90 डिसमिल गैर-मजरुआ खास सरकारी भूमि पर खनन गतिविधियां संचालित हो रही हैं. स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र से प्रतिदिन लगभग 100 हाइवा पत्थर निकाले जा रहे हैं, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है. यदि यह आरोप सही है, तो यह न केवल खनन नियमों का गंभीर उल्लंघन है बल्कि सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का भी मामला बनता है. शिकायतकर्ता देवनंदन राय का आरोप है कि खनन क्षेत्र में लगातार ब्लास्टिंग की जा रही है. इससे खेत, ग्रामीण सड़कें और सार्वजनिक रास्ते क्षतिग्रस्त हो रहे हैं. लगातार होने वाले विस्फोटों से आसपास के कई मकानों में दरारें पड़ गई हैं, जिससे ग्रामीण भय के माहौल में जीवन बिताने को मजबूर हैं.

लगातार न्याय की गुहार लगाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं
देवनंदन राय ने आरोप लगाया कि कोडरमा निवासी धनंजय मेहता एवं बदडीहा-2 निवासी विकास राय की साझेदारी में उक्त खदान का संचालन किया जा रहा है. उनका कहना है कि दिव्यांग होने के बावजूद वे उपायुक्त, जिला खनन पदाधिकारी और अनुमंडल पदाधिकारी, खोरीमहुआ से लगातार न्याय की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. वहीं ग्रामीण अभिमन्यु राय ने आरोप लगाया कि जिस सरकारी भूमि पर अवैध खनन किया जा रहा है, वहीं मत्स्य विभाग द्वारा लगभग सात वर्ष पूर्व करीब 10 लाख रुपये की लागत से निर्मित तालाब को भी मिट्टी और खनन मलबे से भर दिया गया है. ग्रामीणों के अनुसार यह तालाब किसानों के लिए सिंचाई का प्रमुख स्रोत था. यदि यह आरोप सही पाया जाता है, तो यह सरकारी संपत्ति के साथ-साथ किसानों की आजीविका को भी गंभीर नुकसान पहुंचाने का मामला है.

ग्रामीणों का कहना
ग्रामीणों का कहना है कि जब सरकारी जांच रिपोर्ट स्वयं अवैध खनन की पुष्टि कर रही है, तब कार्रवाई में हो रही देरी कई तरह की आशंकाओं को जन्म देती है. लोगों ने सवाल उठाया है कि आखिर दोषियों के विरुद्ध FIR दर्ज करने, मशीनें जब्त करने और अवैध खनन पर रोक लगाने में किस बात की बाधा है. ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, अवैध खनन में संलिप्त लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने, सरकारी भूमि एवं तालाब को हुए नुकसान का वैज्ञानिक आकलन कराने तथा दोषियों से क्षतिपूर्ति की राशि वसूलने की मांग की है. साथ ही प्रशासन से यह भी अपेक्षा की है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर शीघ्र प्रभावी कार्रवाई कर अवैध खनन पर रोक लगाई जाए.
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