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परिसीमन में आदिवासी आरक्षित सीटें घटने की आशंका, 30 अगस्त को होगी ‘आदिवासी एकता महारैली’

Ranchi: आगामी 2026 के परिसीमन में आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटें कम होने की आशंका को लेकर विभिन्न आदिवासी संगठनों ने आंदोलन...

Tribal Unity Mega-Rally

Ranchi: आगामी 2026 के परिसीमन में आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटें कम होने की आशंका को लेकर विभिन्न आदिवासी संगठनों ने आंदोलन का ऐलान किया है. रांची में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं ने घोषणा की, कि आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की रक्षा के लिए 30 अगस्त को ‘आदिवासी एकता महारैली’ निकाली जाएगी.

अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की संख्या घटने की आशंका

नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे परिसीमन प्रक्रिया के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उन्हें आशंका है कि जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों की संख्या घटाई जा सकती है. उनका कहना है कि कुल सीटें बढ़ने के बावजूद आदिवासियों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम होने का खतरा है. उन्होंने इसे दक्षिण भारतीय राज्यों की उस चिंता से जोड़ा, जहां जनसंख्या नियंत्रण के कारण परिसीमन में नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है.

झारखंड में CNT एक्ट, SPT एक्ट और विल्किंसन रूल जैसे कानूनों की अनदेखी

प्रेसवार्ता में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि पिछले 75 वर्षों में संविधान के अनुच्छेद 244 और पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों का प्रभावी ढंग से पालन नहीं किया गया. उनका कहना था कि झारखंड में CNT एक्ट, SPT एक्ट और विल्किंसन रूल जैसे कानूनों की अनदेखी की गई. उद्योग, खनन, रेलवे और बांध परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर आदिवासियों की जमीन अधिग्रहित हुई, जिससे विस्थापन बढ़ा और कई क्षेत्रों की जनसांख्यिकी बदल गई. उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में राज्यपाल को संवैधानिक संरक्षक की भूमिका दी गई है, लेकिन इस मुद्दे पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई.

आदिवासी संगठनों ने केंद्र सरकार और परिसीमन आयोग से की मांग

आदिवासी संगठनों ने केंद्र सरकार और परिसीमन आयोग से पिछले दशकों में आदिवासियों के साथ हुए कथित संवैधानिक अन्याय की जवाबदेही तय करने और उसकी भरपाई करने की मांग की. साथ ही संसद से 75 वर्षों के घटनाक्रम की जांच के लिए संसदीय समिति या न्यायिक आयोग गठित करने की भी मांग उठाई गई.

संगठनों ने यह भी मांग की कि झारखंड के पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों में परिसीमन के बजाय आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटों को यथावत (फ्रीज) रखा जाए. उनका कहना है कि यदि परिसीमन के नाम पर आदिवासियों के राजनीतिक अधिकारों और आरक्षित सीटों में कटौती की गई, तो पूरे राज्य में व्यापक जन आंदोलन किया जाएगा.

यह भी पढ़ें: 26वें स्थापना दिवस पर जुटेगा आदिवासी छात्र संघ, सरना धर्म कोड और परिसीमन पर आंदोलन का ऐलान

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