Ranchi: भारत का संविधान महज पन्नों में सिमटा कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि राष्ट्र की धड़कन है. यदि इसकी रक्षा नहीं हुई, तो आने वाली नस्लों का भविष्य अंधकारमय होगा. यह हुंकार रविवार को रांची के कार्निवल बैंक्विट हॉल में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के स्थायी आमंत्रित सदस्य और झारखंड प्रभारी के. राजू ने भरी. रांची महानगर कांग्रेस द्वारा आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम के तहत आयोजित ‘संविधान संवाद’ में के. राजू ने युवाओं को एक ऐसे रक्षक के रूप में पेश किया, जिसके कंधों पर देश के लोकतांत्रिक ढांचे को बचाए रखने की जिम्मेदारी है.

संविधान पर खतरा, युवाओं का जागना जरूरी
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के. राजू ने कहा कि आज देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की साजिशें रची जा रही हैं. उन्होंने छात्रों से कहा कि आप केवल डिग्री लेने के लिए शिक्षा न प्राप्त करें. आप संविधान के सिपाही बनें. अगर देश की आत्मा यानी संविधान पर चोट होती है, तो यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप सड़कों पर उतरकर इसे बचाएं. राजू ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस के लिए संविधान कोई राजनीति का विषय नहीं, बल्कि जीने का तरीका है. उन्होंने युवाओं से कहा कि वे अपने अधिकारों के प्रति सचेत रहें और समाज में व्याप्त असमानता के खिलाफ संविधान को ‘ढाल’ बनाकर खड़े हों.
संविधान को जीवन का आधार बनाएं: केशव महतो
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को नमन करते हुए कहा कि कांग्रेस ने हर दौर में संविधान की गरिमा के लिए संघर्ष किया है. उन्होंने युवाओं को नसीहत दी कि वे संविधान को केवल परीक्षा का विषय न समझें, बल्कि इसे अपने व्यवहार और चरित्र में उतारें. उन्होंने कहा कि आज के दौर में संविधान की रक्षा का मतलब है—समानता और भाईचारे की रक्षा करना.

संवाद ही लोकतंत्र की संजीवनीः राधाकृष्ण किशोर
राज्य के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने युवाओं की ताकत को रेखांकित करते हुए कहा कि, युवा शक्ति ही वह ऊर्जा है जो लोकतंत्र को जीवंत रखती है. उन्होंने समाज में बढ़ती असहिष्णुता पर चिंता जताई और छात्रों से संवाद की संस्कृति को बढ़ावा देने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि जब युवा संवैधानिक मूल्यों पर चर्चा करेंगे, तो सत्ता के गलियारों में बैठे लोग मनमानी नहीं कर पाएंगे.
सवालों से घिरे नेता, मुखर हुए छात्र
कार्यक्रम का सबसे प्रभावशाली हिस्सा ‘संवादात्मक सत्र’ रहा. यहां छात्र केवल श्रोता नहीं थे, बल्कि प्रश्नकर्ता थे. शिक्षा की गुणवत्ता, बेरोजगारी की बढ़ती दर, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक संस्थाओं के क्षरण पर छात्रों ने तीखे सवाल किए. इन सवालों ने यह साबित कर दिया कि झारखंड का युवा अब चुप रहने वाला नहीं है, बल्कि वह जवाब मांगने की ताकत रखता है. महानगर अध्यक्ष कुमार राजा ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य के युवाओं को वैचारिक रूप से सक्षम बनाना है. उन्होंने जोर दिया कि रांची से शुरू हुआ यह ‘संविधान संवाद’ राज्य के हर कोने तक जाएगा. कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी युवाओं ने हाथ उठाकर इस बात का संकल्प लिया कि वे संविधान की प्रस्तावना के आदर्शों को घर-घर पहुंचाएंगे.


