Ranchi: ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर स्थित ‘लोकसेवा भवन’ के कन्वेंशन सेंटर में मंगलवार को ईस्टर्न जोनल काउंसिल (पूर्वी क्षेत्रीय परिषद) की स्टैंडिंग कमेटी की 15वीं बैठक का आयोजन किया गया. इस उच्च स्तरीय बैठक की मेजबानी ओडिशा के गृह प्रशासन द्वारा की गई. बैठक की अध्यक्षता ओडिशा की मुख्य सचिव अनु गर्ग ने की. इस सम्मेलन में पूर्वी क्षेत्र के सदस्य ओडिशा, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिवों, गृह सचिवों, डीजीपी सहित केंद्र सरकार के शीर्ष अधिकारियों ने हिस्सा लिया. इस एक दिवसीय सत्र का मुख्य उद्देश्य पूर्वी भारत के राज्यों के बीच आपसी तालमेल को मजबूत करना और सुरक्षा व विकास से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करना था.
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राज्यों के बीच चल रहे सीमा विवादों और संसाधनों के बंटवारे से जुड़ी दिक्कतों पर हुई समीक्षा
पूर्व में आयोजित काउंसिल मीटिंग में लिए गए निर्णयों की प्रगति का जायजा लिया गया. इसके अलावा आने वाली मुख्य ‘ईस्टर्न जोनल काउंसिल मीट’ के लिए कोर एजेंडा और प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया गया. साथ ही राज्यों के बीच चल रहे सीमा विवादों और संसाधनों के बंटवारे से जुड़ी दिक्कतों को आपसी समझ से सुलझाने पर जोर दिया गया, ताकि इन्हें आगे मंत्री स्तर पर चर्चा के लिए ले जाया जा सके.
सुरक्षा और कानून व्यवस्था, माओवाद और ड्रग्स पर कड़ा प्रहार
बैठक के एक बड़े हिस्से में कानून व्यवस्था और अंतर-राज्यीय सुरक्षा समन्वय पर गंभीर विमर्श हुआ. ओडिशा और झारखंड की साझा सीमाओं पर सक्रिय माओवादी गतिविधियों को पूरी तरह से जड़ से खत्म करने के लिए दोनों राज्यों के बीच रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग और संयुक्त अभियानों पर सहमति बनी. राज्यों की सीमाओं के पार होने वाली माओवादी फंडिंग और ड्रग्स तस्करी को रोकने की रणनीतियों की समीक्षा की गई. इसके लिए नेशनल नारकोटिक्स कोऑर्डिनेशन पोर्टल के नियमित उपयोग और सभी राज्यों के सिस्टम के साथ इसके एकीकरण पर विशेष बल दिया गया.

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इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी चुनौतियों पर भी एक रणनीतिक ब्लूप्रिंट तैयार किया
सुरक्षा के साथ-साथ कमेटी ने सुदूर ग्रामीण इलाकों के विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी चुनौतियों पर भी एक रणनीतिक ब्लूप्रिंट तैयार किया. पूर्वी राज्यों के पिछड़े और दूर-दराज के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाने पर चर्चा हुई. वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक पहल पर बात की गई, जिसके तहत हर गांव के पांच किलोमीटर के दायरे में एक चालू बैंकिंग आउटलेट या पोस्ट ऑफिस की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी. यह बैठक पूर्वी भारत के राज्यों के बीच आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा के मोर्चे पर एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है.


