Ranchi: झारखंड सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने राज्य के प्रखंडों और अंचलों में पदस्थापित झारखंड प्रशासनिक सेवा (झाप्रसे) के मूल कोटि के पदाधिकारियों के युक्तिसंगत (रैशनलाइजेशन) पदस्थापन के संबंध में एक महत्वपूर्ण संकल्प जारी किया है. जारी इस आदेश को झारखंड राजपत्र के असाधारण अंक में प्रकाशित करने का निर्देश दिया गया है. इस प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री द्वारा नीतिगत सहमति प्रदान किए जाने के बाद मंत्रिपरिषद की बैठक में भी इसे स्वीकृति दे दी गई है.

पदस्थापन को ‘रैशनलाइजेशन’ बनाने की क्यों पड़ी जरूरत?
– सरकारी संकल्प के अनुसार, झारखंड प्रशासनिक सेवा के मूल कोटि के पदाधिकारियों को प्रोन्नति के पश्चात भी प्रशासनिक दृष्टिकोण से उनके द्वारा धारित पद को उत्क्रमित करते हुए वहीं पदस्थापित किया जा रहा था. इसके कारण पदाधिकारियों को अपने वेतनमान, कोटि से निम्नतर कोटि के पदों पर पदस्थापित होना पड़ रहा था, जिससे उनकी कार्यदक्षता एवं क्षमता का उचित संवर्धन नहीं हो पा रहा था.
– वरीयता के अनुकूल पदस्थापन नहीं होने से विषम परिस्थितियां उत्पन्न हो रही थीं और राज्य सरकार को इन अनुभवी अधिकारियों का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा था
– अनुमंडल पदाधिकारी और समकक्ष कोटि के पदों (जैसे- भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, जिला परिवहन पदाधिकारी आदि) पर अपर समाहर्त्ता कोटि के पदाधिकारी पदस्थापित थे. अब इन्हें समकक्ष पदों पर भेजने से अनुमंडल पदाधिकारी कोटि के पद रिक्त हो जाएंगे, जिनपर इन अधिकारियों को तैनात किया जा सकेगा.
प्रशासनिक इकाइयों और पदों का पूरा डेटा
– राज्य सरकार ने इस नीति को लागू करने के लिए पूरे प्रशासनिक ढांचे का डेटा स्पष्ट किया है. झारखंड राज्य में कुल 271 प्रशासनिक इकाइयां हैं. जिनमें राज्य में कुल 264 प्रखंड और 268 अंचल चिन्हित हैं. 271 प्रशासनिक इकाइयों में से वर्तमान में कुल 261 इकाइयों में अंचल अधिकारी (CO) और प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) का पद चिन्हित है. राज्य में कुल सात अंचल और तीन प्रखंड एकल पद के रूप में अधिसूचित हैं.
– वर्तमान में प्रखंड और अंचल में झाप्रसे के मूल कोटि के 257 पदाधिकारी एवं राजस्व सेवा के 67 पदाधिकारी (कुल 324) पदस्थापित हैं.
कैसे किया जाएगा नया पदस्थापन?
– पदों को युक्तिसंगत बनाने के लिए सरकार ने 12 या उससे कम पंचायत वाले क्षेत्रों को आधार बनाया है
– 12 अथवा 12 से कम पंचायत वाले प्रखंड और अंचल को एकल पदस्थापन (या तो केवल बीडीओ या केवल सीओ) के लिए चिन्हित किया जा सकता है.
– 64 प्रशासनिक इकाइयों में दो पदाधिकारियों (अर्थात बीडीओ और सीओ दोनों) का पदस्थापन किया जाएगा.
– 53 प्रशासनिक इकाइयों में केवल अंचल अधिकारी (सीओ) का एकल पदस्थापन होगा.
– 54 प्रशासनिक इकाइयों में केवल प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) का एकल पदस्थापन किया जाएगा.
– यह व्यवस्था मूल कोटि के पदाधिकारियों की पर्याप्त उपलब्धता होने तक प्रभावी रखी जाएगी.
तीन परिशिष्टों में बंटा पूरा खाका
इस नए आदेश के सुचारू क्रियान्वयन के लिए सरकार ने विवरणों को तीन परिशिष्टों में जारी किया है
- परिशिष्ट- I: इसके तहत राज्य के विभिन्न जिलों के कुल 164 प्रखंडों एवं अंचलों को चिन्हित किया गया है, जहां प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) एवं अंचल अधिकारी (सीओ) दोनों के पदस्थापन किए जाएंगे. (इसमें रांची के कांके, नामकुम, रातू; खूंटी के तोरपा; धनबाद के गोविंदपुर आदि शामिल हैं).
- परिशिष्ट- II: इसके तहत कुल 53 अंचलों को चिन्हित किया गया है, जो विशेष रूप से केवल अंचल अधिकारी (सीओ) के पदस्थापन हेतु निर्धारित होंगे. (जैसे- रांची शहर, अरगोड़ा, बड़गाई, हेहल आदि).
- परिशिष्ट- III: इसके तहत कुल 54 प्रखंडों को चिन्हित किया गया है, जो केवल प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) के एकल पदस्थापन के लिए आरक्षित रहेंगे. (जैसे- गुमला का चैनपुर, पलामू का हरिहरगंज
