Koderma: जिले में इस साल करीब 17 हजार हेक्टेयर भूमि में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है. लेकिन कमजोर मानसून के कारण अब तक जिले में एक प्रतिशत भी धान की रोपनी नहीं हो सकी है. खेतों में पानी नहीं है और किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं. जुलाई महीने में जिले में सामान्य 245.7 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक सिर्फ 98.8 मिमी बारिश हुई है. यानी 146.9 मिमी कम बारिश दर्ज की गई है. सामान्य से करीब 60 प्रतिशत कम बारिश होने की वजह से खेतों में रोपनी लायक पानी नहीं पहुंच पाया है. इसका सीधा असर खेती पर पड़ रहा है.
ज्यादातर किसानों ने तैयार कर लिया है धान का बिचड़ा
बारिश कम होने के बावजूद जिले के अधिकांश किसानों ने धान का बिचड़ा तैयार कर लिया है. कृषि विभाग के अनुसार, कोडरमा प्रखंड में 72 प्रतिशत, जयनगर में 75 प्रतिशत, मरकच्चो में 86 प्रतिशत, डोमचांच में 82 प्रतिशत, चंदवारा में 95 प्रतिशत और सतगावां में 85 प्रतिशत क्षेत्र में धान का बिचड़ा लगाया जा चुका है. किसानों का कहना है कि अगर अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो तैयार बिचड़ा खराब होने लगेगा. ऐसे में उन्हें दोबारा बिचड़ा तैयार करना पड़ सकता है, जिससे खेती की लागत बढ़ेगी और नुकसान भी होगा.
कम बारिश से उत्पादन पर पड़ सकता है असर
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर धान की रोपनी नहीं होने से फसल की पैदावार प्रभावित होगी. बारिश की कमी का असर सिर्फ धान ही नहीं, बल्कि मक्का, अरहर, उड़द, मूंग समेत अन्य खरीफ फसलों पर भी पड़ रहा है. कई जगह इन फसलों की बुवाई भी लक्ष्य के अनुसार नहीं हो सकी है. किसानों का कहना है कि अगर जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो इस साल उत्पादन कम हो सकता है और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
धान की खेती का लक्ष्य
कृषि विभाग ने जिले के विभिन्न प्रखंडों में धान की खेती का लक्ष्य तय किया है. इसमें कोडरमा में 1,915 हेक्टेयर, जयनगर में 3,724 हेक्टेयर, मरकच्चो में 2,590 हेक्टेयर, डोमचांच में 3,375 हेक्टेयर, चंदवारा में 2,430 हेक्टेयर और सतगावां में 2,266 हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है.
ALSO READ: राहुल गांधी ने कहा – दस साल में पेपर लीक के 152 मामले, जीरो सजा, 7.5 करोड़ युवाओं का भविष्य बर्बाद
