ACB ने PE संख्या 3/2026 दर्ज कर शुरू की नामकुम लैंड स्कैम की जांच, CO और कर्मचारी समेत कई रडार पर

Vinit Abha Upadhyay Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद रांची के नामकुम इलाके में हुई भूमि की खरीद-बिक्री और अंचल...

नामकुम लैंड स्कैम

Vinit Abha Upadhyay

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद रांची के नामकुम इलाके में हुई भूमि की खरीद-बिक्री और अंचल के दस्तावेजों में हेरफेर की जांच एसीबी ACB ने शुरू कर दी है. प्रारंभिक जांच में घोटाले और गड़बड़ी की पुष्टि के बाद एजेंसी ने इस मामले में पीई PE दर्ज कर अपनी जांच आगे बढ़ा दी है. एसीबी ACB ने नामकुम अंचल में हुए करोड़ों रुपए से ज्यादा कीमत की भूमि से जुड़े विवाद में PE संख्या 3/2026 दर्जकी है. एसीबी ACB ने तत्कालीन अंचल अधिकारी श्वेता वर्मा और तत्कालीन डीलिंग असिस्टेंट दीपक कुमार समेत अन्य के विरुद्ध 15 जुलाई को PE दर्ज की है. एजेंसी ने 8 मई को PE की अनुमति देने के लिए पत्राचार किया था. एसीबी ACB वर्ष 2012-13 से लेकर वर्ष 2014-15 तक नामकुम अंचल में पदस्थापित रहे कई कर्मचारी और अधिकारियों को रडार पर रखा है. अगले सप्ताह से एक- एक कर कई लोगों से पूछताछ भी शुरू कर सकती है.

हाईकोर्ट के आदेश पर की गयी जांच, दस्तावेज गायब मिलें

फिलहाल एसीबी ACB नेअपनी IR (इंटेलिजेंस कलेक्शन रिपोर्ट) की जांच में यह पाया है कि नामकुम अंचल के डुंडू गांव स्थित खाता नंबर 32, प्लॉट नंबर 776, 820 और 821 जिसका कुल रकबा 1.22 एकड़ है. इस जमीन की बिक्री डीड नंबर 30931/26404 के माध्यम से की गई है. इस जमीन का दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) केस नंबर 356 R 27/2013-14 के जरिए किया गया था. यह म्यूटेशन तत्कालीन अंचल अधिकारी CO डॉ. श्वेता वर्मा ने 11 मई 2013 को प्रथम प्रकाश कमर्शियल प्रा. लि. कंपनी के निदेशक चंद्र प्रकाश धेलिया के नाम पर किया था. लेकिन जब हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस भूमि से जुड़े दस्तावेजों के लिए फाइलों की खोजबीन शुरू हुई तो पता चला कि अंचल कार्यालय से इस म्यूटेशन केस के संपूर्ण मूल दस्तावेज ही गायब है. एसीबी ACB ने अपनी जांच रिपोर्ट में तत्कालीन डीलिंग असिस्टेंट दीपक कुमार की भूमिका को बेहद संदिग्ध और गंभीर माना है.

बार-बार दस्तावेज मांगने पर भी उपलब्ध नहीं कराया गया

फिलहाल नामकुम सीओ CO के पद पर कार्यरत कमल किशोर सिंह ने जब फाइलों को खोजने और उपलब्ध कराने के लिए डीलिंग असिस्टेंट दीपक कुमार को कई बार आधिकारिक पत्राचार किया लेकिन उन्होंने जानबूझकर रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया. जांच में यह बेहद सनसनीखेज बात सामने आई है कि राजस्व कर्मचारी विक्रम महली की मृत्यु वर्ष 2023 में सेवाकाल के दौरान ही हो गई थी. डीलिंग असिस्टेंट दीपक कुमार बार-बार दस्तावेज न देने के पीछे मृत कर्मचारी का मृत्यु प्रमाण पत्र अंचल कार्यालय में पेश कर अपने ऊपर से जिम्मेदारी हटाने और इसका गलत लाभ उठाने का प्रयास कर रहा है. सीओ CO ऑफिस से किसी भूमि के महत्वपूर्ण दस्तावेजों का गायब होना कोई सामान्य लापरवाही नहीं है. यह तत्कालीन अंचलाधिकारी डॉ. श्वेता वर्मा, डीलिंग असिस्टेंट दीपक कुमार, तत्कालीन अंचल निरीक्षक और अंचल कार्यालय के अन्य पदाधिकारियों और कर्मियों की आपसी मिलीभगत और साठगांठ की ओर साफ इशारा करता है.

 

ALSO READ : बस चालक के कहने पर छत पर सफर कर रहा यात्री मुआवजे से वंचित नहीं होगा: झारखंड हाईकोर्ट, 11.13 लाख देने का आदेश

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *